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प्रकाशन तिथि: फरवरी 14, 2008
व्यक्तित्व के विकास में शैक्षणिक यात्राओं का महत्व संदर्भ विज्ञान मंथन यात्रा
part 2...
अमिताभ श्रीवास्तव
म.प्र. में काउन्सिल आफ साइंस एण्ड टेक्नालाँजी भोपाल ने २८ जनवरी २००८ से ०६ फरवरी २००८ तक मिशन एक्सेलेंस के अपने कार्यक्रम के अंतर्गत एक सर्वथा अभिनव आयोजन किया . ११०० बच्चों को विज्ञान मंथन एक्सप्रेस नामक विशेष रेलगाड़ी के द्वारा आक्सफोर्ड आफ ईस्ट के रूप में विख्यात हो रहे शहर पुणे , सिलिकान वैली आफ इण्डिया कहे जाने वाले शहर बंगलोर व तीन सागरों की मिलन स्थली कन्या कुमारी की विज्ञान केंद्रित शैक्षणिक यात्रा करवाई गई . इस नवाचार की व्यापक प्रशंसा हो रही है . प्रदेश के स्कूलों में कक्षा ८, ९, व ११ में अध्ययनरत प्रतिभावान छात्रों में से स्वतंत्र विज्ञापन के द्वारा आवेदन आमंत्रित किये गये . पिछली क्लास के प्राप्तांको व अन्य मापदण्डों के आधार पर विशेषज्ञों ने १००० बच्चों का चयन किया . इनमें लगभग ४० प्रतिशत लड़कियां शामिल थीँ . माखनलाल पत्रकारिता विश्वविश्वविद्यालय भोपाल के विद्यार्थी भी इस शैक्षणिक भ्रमण में शामिल किये गये . प्रत्येक १० बच्चों पर एक अभिवावक शिक्षक बनाया गया . राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान जबलपुर को नरचरिंग का कार्य सौंपा गया . यात्रा के दौरान बच्चों को वैज्ञानिकों से मिलवाया गया , बच्चों की जिज्ञासाओ का समाधान किया गया . यात्रा के इन १० दिनों में रेल का डिब्बा ही छात्रों का घर था. क्विज के आयोजन हुये . योजना है कि इन्हीं बच्चों में से अप्रैल माह में एक परीक्षा लेकर १०० बच्चों का चयन किया जावेगा , जिन्हें उच्च शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति दी जावेगी . समग्र रूप से म.प्र. सरकार का यह आयोजन अद्भुत व प्रशंसनीय रहा . जिसका विस्तार अपेक्षित है . यात्रा में बच्चों को पुणे की नेशनल केमिकल लेबोरेटरी , जहाँ पर पाँलिमर साइंस पर विश्व स्तरीय अनुसंधान हो रहे हैं का भ्रमण करवाया गया . इण्टर युनिवर्सिटी सेंटर फार एस्ट्रोनाँमी एण्ड एस्ट्रोफिजिक्स पुणे , सेंटर फार डेवेलपमेंट आफ एडवांस कम्प्यूटिंग पुणे भारतीय एग्रो इंडस्ट्रीज फाउण्डेशन पुणे एवं E T H रिसर्च लेबोरेटरी पुणे भी बच्चों ने वहाँ जाकर देखे . हाई टेक सिटि बंगलोर में नेशनल सेंटर फार बायोलाँजिकल साइसेंज , इण्डियन स्पेस रिसर्च आर्गनाइजेशन , विश्वैश्वरैया इण्डस्ट्रियल एण्ड टेक्नालाजिकल म्यूजियम जैसे संस्थानो का अविस्मरणीय भ्रमण आयोजित किया गया . कन्या कुमारी में बच्चों को देश की अस्मिता के प्रतीक स्वामी विवेकानंद से परिचित करवाने विशिष्ट कार्य किया गया . इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को सुनियोजित ढ़ंग से समय सीमा में यात्रा करवाना एक बड़ा चैलेंज था , जिसकी व्यवस्था के लिये प्रत्येक स्थान पर एक एडवांस टीम भेजी गई थी . छोटी मोटी असुविधाओं के अलावा सारी यात्रा निर्विघ्न संपन्न हुई . यह आयोजकों की एक बहुत प्रशंसनीय उपलब्धि है . "फासले सोचने नहीं देते , मुझे देखो करीब आकर" के फलसफे पर आयोजित यह विज्ञान मंथन यात्रा ने सारे प्रतिभागियों को अमृत रस पान करवाया है ,जिसका उनके व्यक्तित्व पर दीर्घ कालीन सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा ऐसी आशा है . अमिताभ श्रीवास्तव एक सहभागी यात्री