बीपीओ यानी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग एक नई व्यापार संकल्पना है...बीपीओ यानी बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग एक नई व्यापार संकल्पना
है, जिसका अर्थ है किसी संगठन के प्रमुख व्यापारिक/उत्पादक कार्यों से इतर, परंतु महत्वपूर्ण अनुषंगी कार्यों को किसी बाहरी विक्रेता को हस्तांतरित करना, जो सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित सेवा वितरण प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा हो। इसमें वितरण चूंकि आईटी आधारित होता है, इसलिए बीपीओ को सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं (आईटीईएस-यानी आईटी इनेबल्ड सर्विसेज) भी कहा जाता है। इन अनुकूल स्थितियों में बड़ी संख्या में अंग्रेजी बोलने वाली आबादी, व्यापक कम्प्यूटर साक्षरता, व्यक्तिगत खर्च में कमी, अनुकूल समय-क्षेत्र और उच्च गुणवत्ता युक्त कार्य शामिल हैं। नतीजतन रोजगार के अवसरों में भी महत्वपूर्ण वृद्धि होने की संभावना है। भारत में बीपीओ क्षेत्र १९९० के दशक के प्रारंभ में जनरल इलेक्ट्रिक नामक अमरीकी कम्पनी ने यह महसूस किया कि बैक-ऑफिस यानी प्रमुख व्यापारिक क्रिया-कलाप से इतर कुछ गतिविधियों और ग्राहक सेवा प्रक्रियाओं को भारत में स्थानांतरित करके महत्वपूर्ण लाभ उठाए जा सकते हैं। उसने अपने कार्य-व्यापार प्रक्रिया कारोबार (ट्रांजेक्शन प्रोसेसिंग वर्क) का कुछ अंश और कॉल सेंटर भारत में स्थानांतरित किए। लागत, गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार को देखते हुए अनेक कम्पनियां इस दिशा में प्रेरित हुईं और उन्होंने विदेश में अपना कारोबार आरंभ किया तथा तेजी से उसका विस्तार किया। चीन और कनाडा जैसे देशों के साथ भारत धीरे-धीरे आईटी आउटसोर्सिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसकी वजह यह है कि भारत में अत्यन्त कुशल एवं प्रशिक्षित कार्मिकों का समूह उपलब्ध है और यहां भली-भांति परिभाषित व्यापार प्रक्रियाओं को तेजी से अपनाया जा रहा है। बीपीओ के लिए भारत को प्रमुख लक्ष्य बनने के पीछे एक प्रमुख कारण यह भी है कि हमारे यहां संचार का मजबूत ढांचा कायम हो चुका है। हाल ही में समुद्र में बिछायी गई भारत की प्रथम प्राइवेट केबल के चालू हो जाने से अंतर्राष्ट्रीय बैंडविड्थ स्थिति में जबरदस्त सुधार आया है। कॉल सेंटर भारत को आउटसोर्सिंग का लक्ष्य बनाने वाले प्रारंभिक संगठनों के अध्ययन से पता चलता है कि इस क्षेत्र में प्रमुख संगठनों का वर्चस्व रहा है जिनमें बीमा, बैंकिंग, फार्मास्युटिकल्स, दूरसंचार, ऑटोमोटिव और एयरलाइन्स शामिल हैं। उपरोक्त सूची में से बीमा और बैंकिंग ऐसे क्षेत्र हैं जो भारी मात्रा में बचत राशि हासिल करने में सिर्फ इसलिए कामयाब रहे हैं कि वे अपनी प्रक्रियाओं का बड़ा हिस्सा बाहरी एजेंसियों को सौंप सकते हैं। वे कॉल सेंटरों के जरिए दावे और ऋण प्रोसेस करने तथा ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने जैसे कार्य संचालित कर सकते हैं। अनुसंधान से पता चला है कि अमरीका/ब्रिटेन में कॉल सेंटरों के संचालन में आने वाली करीब ७० प्रतिशत लागत का सीधा संबंध प्रशिक्षण, लाभ और अन्य श्रम प्रोत्साहनों सहित कार्मिकों पर आने वाली लागत के साथ है। जबकि भारत में कार्मिकों से संबंधित लागत मात्र ३५ प्रतिशत के आस-पास बैठती है। अन्तर्राष्ट्रीय कॉल्स परिचालित करने वाले ध्वनि आधारित कॉल सेंटर में शामिल कुछ महत्वपूर्ण घटक नीचे दिए गए हैं :-
१. आईपीएलसी (अन्तर्राष्ट्रीय प्राइवेट लीज्ड सर्किट) लाइन।
२. डाइलर। ३. सीटीआई (कम्प्यूटर टेलीफोनी इंटीग्रेशन)-
४. एसीडी (ऑटोमेटिक कॉल डिस्ट्रिब्यूशन)- ५. आईवीआर (इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पोन्स)-
६. वॉयस लॉगर
७. एमयूएक्स-
८. कॉल सेंटर प्रबंधन सॉफ्टवेयर - ९. एलएएन केबलिंग - बीपीओ - अवसर नैस्कोम के अनुसार निकट भविष्य में बीपीओ उद्योग के लिए कुछ महत्वपूर्ण व्यापार संभावनाएं इस प्रकार हैं :
१. ग्राहकों की सेवाएं २. विपणन सेवाएं ३. मानव संसाधन सेवाएं :
५. इंजीनियरी सेवाएं :
६. लॉजिस्टिक्स या संभार तंत्र :
७. स्वास्थ्य देखभाल :