अपनी मोहब्बत पर हज़ारों दावे वो करता है
हर पल अपनी दीवानगी के दिखावे वो करता है
कोशिश यही करे के उसकी आशिक़ुई
में खहोजौन
बिना किसी शर्त के में उसकी उम्र भर की होजौन
कभी देखे, कभी मुस्कुराए, कभी घहबराए
सामने आए तो गुमसूँ, कुछ कहते हुए रुकजाए
ना चाहते हुए उसकी नादानियाँ हंसायें मुझे
उसकी मासूम अदायें ऐसे फांसायें मुझे
उसकी सचाई पर एतबार है, क्यूँ वो कोशिश करे
मेरे दिल में जगाह बनाने की नई साज़िश करे
कैसे समझाओन ये सूब बेवजह, बेमतलब है
मुझे पाने की क्यूँ इस क़द्र तुझको तलब है
कहता है जो चाहूं उससे माँगूँ, मुझे दे देगा
जान, ज़िंदगी, साँसें, हर पल नाम मेरे लिख़्ड़ेगा
ये जो चीज़ें हैं ये तुम्हारी अपनी नई, खुदा की है
जो में चाहूं तुमसे, बात सिर्फ़ सच्ची वफ़ा की है
जान तेरी नई, ज़िंदगी बेवफा, साँसें टूट जाती है
डोर पल की जितना बी तहामो, वो तो छ्छूट जाती है