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प्रकाशन तिथि: फरवरी 14, 2008
bijli chori ke viruddh jan jagran
part 3 .... contd.
by vivek ranjan shrivastava
बिजली चोरी के खिलाफ जन जागरण से बिजली चोरी करते हुये भी लोग एक दूसरे से वैसे ही डरेंगे जैसे अन्य किसी चोरी के प्रति उनमें अपराध भाव होता है . ऐसा सामाजिक वातावरण बन जाने पर लोग बिजली चोरी करने वाले को हिकारत की दृष्टि से देखेंगे . तब बिजली चोरी रोकने में लगे अमले को जन सहयोग मिल सकेगा . बिजली देश के विकास की सतत प्रवाही ऊर्जा है . बिजली लिंग , जाति , धर्म , राज्य , प्रत्येक कुत्सित सीमा से परे सबके प्रति समदर्शी है . इसका मितव्ययी , विवेक पूर्ण , सदुपयोग समय की जरूरत है . आइये बिजली चोरी के विरूद्ध जनजागरण में अपना योगदान दें . बच्चों के पाठ्यक्रम में इस विषय पर सामग्री शामिल की जानी चाहिये . अशासकीय समाजसेवी संस्थायें बिजली को अपना विषय बनायें . केंद्र व राज्यों की उत्पादन ,पारेषण ,वितरण से जुडी सभी संस्थायें , ब्यूरो आफ इनर्जी एफिसियेंशी आदि संस्थान बिजली चोरी के विरुद्ध ठोस ,रचनात्मक ,जागरूखता अभियान मीडिया के माध्यम से प्रारंभ करें . पहले लोगों को बिजली चोरी कानून की पूरी जानकारी दी जाये , तभी उसके परिपालन की प्रभावी कार्यवाही हो सकती है . बिजली चोरी के विरुद्ध आपका सहयोग , सुझाव सादर आमंत्रित हैं बिजली चोरी समूचे विकास तंत्र को खोखला कर रही है . बिजली चोरी के प्रकरणों में लोक अदालतें बडी भूमिका निभा सकती हैं . बिजली चोरी रोकने में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है , क्योंकि घरों पर आचरण , चरित्र , व चोरी की बिजली के उपयोग के विरुद्ध धार्मिकता जन जागरण का विषय है . समुदाय विशेष के लोग प्रायः एक ही बस्ती में रहते हैं , वे महिलाओं के पर्दे की आड लेकर उडनदस्ता टीमो को चैकिंग ही नही करने देते ,व व्यापक बिजली चोरी करते हैं . हैदराबाद में यह सिद्ध हो चुका है . अतः ऐसे प्रकरणों में अप्रिय कटुता से बचने के लिये व्यापक स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है . सावधान !बिजली चोरी की कानूनी सामान्य सजा , १ वर्ष की अनुमानित खपत का दुगना बिल है . साथ ही अपराधिक जबाबदेही के तहत कम्पाउंडिंग शुल्क व जेल की सजा का प्रावधान भी है . बिजली के मीटर तकनीकी कारणों से फोन के मीटर की तरह एक ही स्थल पर नहीं लगाये जा सकते , वे उपभोक्ता के परिसर में लगाये जाते हैं , समय के साथ उपभोक्ता भवन में अतिरिक्त निर्माण कर डालता है , जिससे बिजली के मीटर घरों के भीतर बिजली कर्मचारियों की सहज पहुँच से बाहर हो जाते हैं . यह गलत है . इसके विरुद्ध कानून बनाये जाने की जरूरत है . सामान्य रूप से मीटर की टर्मिनल सील उपभोक्ता तोड लेते हैं , इस पर कानूनी व्यवस्था जरूरी है . बिजली के मीटर घर के एकदम बाहर हों , उनमें इनकमिंग तार बोर्ड के बाहर से मीटर में आयें . सर्विस लाइन बिना जोड की हो यह उपभोक्ता की जबाबदारी होनी चाहिये . बिजली चोरी रोकने के लिये पुलिस का हस्तछेप जरूरी है , क्योंकि चोर पुलिस से डरता है न कि इंजीनियर्स से. बिजली बिल से बचने के लिये बिजली चोरी करने की अपेछा इनर्जी आडिट करें . प्रकाश हेतु सी.एफ.एल. , आई. एस .आई. उपकरणों के उपयोग से बिना बिल बढ़ाये , बिना सुविधायें घटाये आप बेहतर प्रबंधन से मितव्ययी तरीके से बिजली का उपयोग कर सकते हैं . अनेक सुसंपन्न लोगों के नाम भी आंशिक बिजली चोरी के प्रकरणों में दर्ज हैं जो इस बात का द्योतक है कि बिजली चोरी के विरुद्ध व्यापक कार्य किये जाने की आवश्यकता है .