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प्रकाशन तिथि: फरवरी 14, 2008
bijli chori ke viruddh jan jagran
contd....part 2 by vivek ranjan shrivastava
नये विद्युत अधिनियम के अनुसार विद्युत नियामक आयोग राज्य स्तर पर विद्युत उपभोग की दरें तय कर रहे हैं . ये दरें शुद्ध व्यवसायिक आकलन पर आधारित न होकर कृषि , घरेलू , व्यवसायिक , औद्योगिक आदि अलग अलग उपभोक्ता वर्गों हेतु विभिन्न नीतियों के आधार पर तय की जाती हैं . विद्युत उत्पादन हेतु प्रकृतिदत्त कोयले के भण्डार तेजी से प्रयुक्त हो रहे हैं , ताप विद्युत गृह से होता प्रदूषण , या पनबिजली के लिये बनाये गये बांधों से जंगलों के डूबने से पर्यावरण को जो अपूरणीय छति हो रही है , उसके चलते बिजली का दुरुपयोग सामाजिक अपराध निरूपित किया जा सकता है . ऐसी स्थिति में बिजली चोरी कितना संगीन अपराध है , यह समझना बहुत सरल है . बिजली के मुफ्त उपयोग को बढ़ावा देकर , दी गई सुविधायें वापस लेने के नियम तो सरकारों ने बिजली व्यवस्था के सुधार हेतु बना दिये हैं पर अब तक बिजली चोरी के विरूद्ध कोई बडा जन शिक्छा अभियान किसी ने नहीं चलाया है . सर्व शिक्छा अभियान , पल्स पोलियो , आयोडीन नमक , एड्स , परिवार नियोजन , भूजल संवर्धन आदि राष्टीय कार्यक्रमों के लिये व्यापक जन जागरण , रैली , विग्यापन , भाषण , लेख , फिल्म आदि द्वारा जनचेतना जगाने के प्रयास हम सब ने देखे हैं . इनका महत्व निर्विवाद है . वर्तमान परिदृश्य में अनिवार्य आवश्यकता है कि बिजली चोरी के विरुद्ध भी गांव गांव , शहर शहर , स्कूल कालेज , समाज के प्रत्येक स्तर पर बृहद आयोजन हों . आम आदमी के मन में बिजली चोरी को एक सामाजिक अपराध के रूप में प्रतिष्ठित किया जावे . इस कार्य के लिये गैर शासकीय सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी तय की जानी चाहिये . केवल कानून बना देने से , और उसके सीधे इस्तेमाल से बिजली चोरी की विकराल समस्या हल नहीं हो सकती . कानूनी रूप से तो भीख मांगना भी अपराध है पर स्वयं न्यायालयों के सामने ही भिखारियों को सहजता से देखा जा सकता है . हमारे जैसे लोकतांत्रिक जन कल्याणी देश में वही कानून प्रभावी हो सकता है जिसे जन समर्थन प्राप्त हो . आंध्रप्रदेश के मुख्य मंत्री चँद्रबाबू नायडु ने ढ़ृड इच्छा शक्ति से बिजली चोरी के विरूद्ध देश में सर्व प्रथम कशे कदम उठाये पर इससे किंचित बिजली चोरी भले ही रुकी हो पर उन्हें सत्ता गंवानी पडी . मध्य प्रदेश सहित प्रायः राज्यों में विद्युत वितरण कम्पनियों ने विद्युत अधिनियम २००३ की धारा १३५ के अंर्तगत बिजली चोरी के अपराध कायम करने के लिये उडनदस्तों का गठन किया है . पर विभिन्न शासकीय सीमाओं के चलते , इन दलों में विशेष बिजली चोरी रोकने के विशेषग्यों की नई भर्ती की अपेछा कम्पनी में ही अन्य कार्यों में कार्यरत कर्मचारियों का उपयोग किया जा रहा है .किसी और कार्य में दछ कर्मचारियों से , बेमन से , विवशता में उडनदस्ता कार्य करवाये जाने से अनुकूल परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं .बिजली चोरी पर जन शिछा के अभाव में इन उडनदस्तों को जगह जगह नागरिकों के गहन प्रतिरोध का सामना करना पड रहा है .मारपीट , गाली गलौच , झूठे आरोप एक आम समस्या है .cont..... part 3