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(Pareshaan )Farheen ki Shayari

द्वारा : Mahendra Yadav    


परेशान तुझसे दिल लगा कर में परेशान हो चुका हूँ
जैसे के दुनिया की नज़र में बेईमान हो चुका हूँ
किसी अपने को
क्यूँ आज मेरा चेहरा रास नहीं आता
लगता है खोगआया हू, खुद से अंजान हो चुका हूँ
दिल के गहराई में मचले, और बेबस होकर दूं तोड़ दें
क्या में किसी टूटे दिल का अड़हुरा अरमान हो चुका हूँ
बोत कुछ सहा है मैने, सिर्फ़ तेरे लिए ही आय- ज़ालिम
अब और नही से सकता, बस अब तो बेजान हो चुका हूँ
इतने दुख दिए हैं, इतने ज़ुल्म किए हैं लोगों पर मैने
इंसान में शुमार नही, अब तो शैतान हो चुका हूँ -फ़रहीन

प्रकाशन तिथि: अक्तूबर 09, 2007
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