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(Pareshaan )Farheen ki Shayari
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परेशान तुझसे दिल लगा कर में परेशान हो चुका हूँ
जैसे के दुनिया की नज़र में बेईमान हो चुका हूँ
किसी अपने को
क्यूँ आज मेरा चेहरा रास नहीं आता
लगता है खोगआया हू, खुद से अंजान हो चुका हूँ
दिल के गहराई में मचले, और बेबस होकर दूं तोड़ दें
क्या में किसी टूटे दिल का अड़हुरा अरमान हो चुका हूँ
बोत कुछ सहा है मैने, सिर्फ़ तेरे लिए ही आय- ज़ालिम
अब और नही से सकता, बस अब तो बेजान हो चुका हूँ
इतने दुख दिए हैं, इतने ज़ुल्म किए हैं लोगों पर मैने
इंसान में शुमार नही, अब तो शैतान हो चुका हूँ -फ़रहीन
प्रकाशन तिथि:
अक्तूबर 09, 2007
Mahendra Yadav के द्वारा और अधिक संक्षेपण
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