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श्वूंग होम>कला और ह्यूमेनिटज़>सिद्धांत और आलोचना

सिद्धांत और आलोचना

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लम्बी उम्र की १०० दुआएं'-02

(2 समीक्षा)
लेखक : varsa   Summary: krititomar
मैंने एक बुज़ुर्ग आदमी से पूछा की मुझे यहाँ जाना है, बुज़ुर्ग आदमी ने कहा की इस नाम की जगह तो यहाँ कोई नहीं है, हाँ एक गाँव है इस नाम का वहां चले जाओ, मैंने वैसा ही किया और उस गाँव की ओर चल पड़ा.
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प्रकाशन तिथि: 02 अप्रैल 2013 विजिट्स: 6 शब्द : 600

आप अपने आप को शाकाहारी कहते है !

लेखक : rajeev dixit   Summary: AstrologerNeerajSood
भारत मे कुल 3600 बड़े कत्लखाने है जिनके पास पशुओ को काटने का लाईसेंस है !! जो सरकार ने दे रखा है इसके इलावा 35000 से अधिक छोटे मोटे कत्लखाने है जो गैर कानूनी ढंग से चल रहे है कोई कुछ पूछने वाला नहीं.
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प्रकाशन तिथि: 03 नवम्बर 2012 विजिट्स: 10 शब्द : 900

यथा राजा तथा प्रजा.3

(6 समीक्षा)
(1 comments)
लेखक : payal   Summary: SavitaBhawi
दूतावास में भाग गईं और वहीं छिपी रहीं यहां तक की इस मौके पर उन्होंने इंदिरा गांधी को भी उस समय छोड़ दिया। ये बात अब कोई नई नहीं है बल्कि कई बार प्रकाशित भी हो चुकी है.
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प्रकाशन तिथि: 25 सितम्बर 2011 विजिट्स: 85 शब्द : 900

मिर्च ज्यादा हो जाती है

(2 समीक्षा)
लेखक : RIMJIM   Summary: rimjim
बुद-बुद फूट पड़े आते हैं, भाव पुराने भाने वाले,छुट्टे छंद बंद होठों को, सदा नहीं सिलवाने वाले.कथा नाम के पद्य अबाधा,जिनका होना सीधा साधा,वज्र कठिन साधन संधाना, यथा विधा को पाना आधा.
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प्रकाशन तिथि: 22 अगस्त 2011 विजिट्स: 17 शब्द : 600

बाज तूफान से बचने की कोशिश नहीं करता

(1 समीक्षा)
हवा उसे तूफान के ऊपर उठा ले जाती है। तूफान जब नीचे की ओर गरज कर तबाही मचा रहा होता है, बाज उसके ऊपर आराम से उड़ता रहता है। बाज तूफान से बचने की कोशिश.
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प्रकाशन तिथि: 27 नवम्बर 2010 विजिट्स: 44 शब्द : 300

क्योंकि मैं ईश्वर में विश्वास करता हूँ

(1 समीक्षा)
धार्मिकता की यह नि:संकोच और सुदृढ़ अभिव्यक्ति उस विचारधारा पर कड़ा प्रहार थी, जो यह कहने से नहीं हिचकिचाती कि ‘आधुनिक पीढ़ी तो बस भौतिकता में ही रमी ह.
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प्रकाशन तिथि: 27 नवम्बर 2010 विजिट्स: 32 शब्द : 600

इस कालिख को मिटाने का कोई दिया जलाएं

(2 समीक्षा)
जब अधिकांश लोग देवी दुर्गा की आराधना के लिए संयम का संकल्प लेते हैं, क्यों न यह संकल्प भी लिया जाए कि भ्रूण लिंग परीक्षण और कन्याओं की गर्भ में हत्या.
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प्रकाशन तिथि: 27 नवम्बर 2010 विजिट्स: 30 शब्द : 900

नक्सलवाद का समाधान योग में

(1 समीक्षा)
वे सीधे बाबा की शरण में जायें और उनसे नक्सली तथा उनके समर्थकों के लिए समुचित योगासन की जानकारी लें। फिर सभी राज्य सरकारों को इसे सजेस्ट करें.
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प्रकाशन तिथि: 27 नवम्बर 2010 विजिट्स: 29 शब्द : 900

कोई रहस्य नहीं भविष्य

(1 समीक्षा)
लेखक : राजावतसरोज   Summary: rajawat
कोई काग़ज़ का टुकड़ा जो हमारे जन्म का समय और आसमान में ग्रह के स्थिती के आधार पर बनाये जाता है. हम हर कोई बड़ा कार्य करने से पहले, हमारे ज्योतिष से उन.
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प्रकाशन तिथि: 21 नवम्बर 2010 विजिट्स: 27 शब्द : 600

पत्नी कि नींद की कुर्बानी

(1 समीक्षा)
सोते समय पति के खर्राटों से पत्नियाँ अधिक परेशान होती हैं और उनकी नींद टूट जाती है। इसके विपरीत पति के अपनी पत्नी के बार-बार करवट बदलने के कारण उनकी न.
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प्रकाशन तिथि: 21 नवम्बर 2010 विजिट्स: 34 शब्द : 600
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ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन........

(28 समीक्षा)
लेखक : saroj rajawat   Summary: rajawat
हम कभी भी बड़ी उम्र की महिला और कम उम्र के लड़के या लड़की या बड़ी उम्र के पुरुष के साथ कम उम्र की लड़की या लड़के की कल्पना नहीं कर पाते। ऐसा क्यों?
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प्रकाशन तिथि: 29 अप्रैल 2010 विजिट्स: 1840 शब्द : 600

मेरी पहली हवाई यात्रा की ।

(16 समीक्षा)
लेखक : सरोज राजावत   Summary: rajawat
इस कड़ाके की ठंड में गँवार की दुकान की थोड़ी चाय पेश रहा हूँ, मलाई मारकर । आशा है, चुस्की मारकर पियेंगे । वैसे पसंद न आए तो इसे फेंकने की चिंता मत किज.
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प्रकाशन तिथि: 23 मई 2010 विजिट्स: 731 शब्द : 900

मैं स्त्री हूँ .

(10 समीक्षा)
Summary: rajawat
काव्य में मुझे श्रृंगार कभी प्रिय नहीं रहा ॥ मुझे वीर रस पसंद है ..... प्रेम में भी वही शिद्दत । जन्मी ब्राहमण के घर पर अपने मूल स्वाभाव से क्षत्राणी.
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प्रकाशन तिथि: 25 मई 2010 विजिट्स: 635 शब्द : 300
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काल्पनिक स्वदेश

(2 समीक्षा)
लेखक : सलमान रुश्दी   Summary: Dabang
काल्पनिक स्वदेश बताते हैं क्या bookers पुरस्कार के बुकर नीचे झूठ! यह निबंध का एक संग्रह है. यह पर्याप्त सर सलमान Rushdi पर प्रकाश डालती है.
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प्रकाशन तिथि: 13 अक्तूबर 2010 विजिट्स: 160 शब्द : 600

मिर्च ज्यादा हो जाती है

(2 समीक्षा)
लेखक : RIMJIM   Summary: rimjim
बुद-बुद फूट पड़े आते हैं, भाव पुराने भाने वाले,छुट्टे छंद बंद होठों को, सदा नहीं सिलवाने वाले.कथा नाम के पद्य अबाधा,जिनका होना सीधा साधा,वज्र कठिन साधन संधाना, यथा विधा को पाना आधा.
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प्रकाशन तिथि: 22 अगस्त 2011 विजिट्स: 17 शब्द : 600

लम्बी उम्र की १०० दुआएं'-02

(2 समीक्षा)
लेखक : varsa   Summary: krititomar
मैंने एक बुज़ुर्ग आदमी से पूछा की मुझे यहाँ जाना है, बुज़ुर्ग आदमी ने कहा की इस नाम की जगह तो यहाँ कोई नहीं है, हाँ एक गाँव है इस नाम का वहां चले जाओ, मैंने वैसा ही किया और उस गाँव की ओर चल पड़ा.
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प्रकाशन तिथि: 02 अप्रैल 2013 विजिट्स: 6 शब्द : 600
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इस श्रेणी में सिद्धांत और आलोचना समीक्षाएं, किताबों के सारांश और लेखों के सार तत्वों और सिद्धांत और आलोचना से संबंधित शैक्षिक पेपर शामिल हैं. प्रत्येक प्रस्तुति श्वूंग समुदाय के सदस्यों द्वारा बनाई जाती है. क्या आप अपना लिखना चाहते हैं? अधिक जानकारी प्राप्त करें इस बारे में कि कैसे ऑन लाइन धन कमाया जाए!