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श्वूंग होम>कला और ह्यूमेनिटज़>धार्मिक अध्ययन>चमत्कारी तांत्रिक टोटको से करें भाग्य वृद्धि..

चमत्कारी तांत्रिक टोटको से करें भाग्य वृद्धि..

द्वारा: NeerajSood     लेखक : neer77
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विभिन्न प्रकार की चमत्कारी वनस्पतियों एवं प्रकृति की अनोखी वस्तुओ का विधि-विद्गोष के साथ प्रयोग ही व्यवाहारिक तंत्र का आधार है। तंत्र-टोटका केवल तन को सुख देने वाला होता है।

साधना- क्रिया मे मंत्र की भी आवद्गयकता होती है। पर जिस प्रकार प्राण-धारण के लिए शरीर आवद्गयक है उसी प्रकार तंत्रटोटका मे अदुभुत दुर्लभ वस्तुओं की परम आवद्गयकता होती है। यहां अनुभव सिद्व तांत्रिक टोटका वस्तुओ की पूर्ण जानकारी के लिये तांत्रिक प्रयोग के बारे में विशेष सतर्कता आवश्यक है।

आजकल बाजारों में नकली सियारसिंगी व हत्थाजोडी अधिक मिलती है अतः इनसे वांच्छित प्रभाव नही की जा सकती।

प्रामाणिक असली वस्तु परीक्षण कर सावधानी पूर्वक खरीदकर लाभ प्राप्त करें। उससे सफलता अवद्गय मिलती है। असली सामग्री सिद्ध होकर साधक का सभी कार्य पूर्ण करती है !

1-सिंयार सिंगीः-यह पद्गाु तंत्र शास्त्र की अमूल्य निधि है इसको गीदडसिंगी भी कहते है। वन्य-पद्गाुओं में नरसियार के सिर पर एक प्रकार की गांठ होती हैं उसे ही सिंयार सिंगी कहा जाता है। सियारसिंगी की गाठें तंत्र शास्त्र में अदुभुत शक्ति सम्पन्न बतायी गई है। सिंयारसिगी में सुरक्षा, सम्मोहन, वंद्गाीकरण, सम्पति वर्द्धन की दिव्य-शक्ति होती हैं।

इसे किसी विद्गवसनीय तात्रिंक से ही प्राप्त कर निम्न मंत्र द्वारा 'सिद्व कुरू-कुरू नमः' मंत्र से शुभ मुहुर्त में एक आक के पते पर रखना चाहिए। पूर्व में मुख करके सिंयार सिंगी को रखना चाहिए। साधक 108 बार एक रूद्राक्ष माला से 11 दिन तक फूंक मारे। आक-पत्र को रोजाना बदलना चाहिए। ऐसा करने पर सियारसिंगी सिद्व होगी। सिद्व होने पर इसे चांदी या स्टील की डिब्बी के अन्दर रखना चाहिए, साथ मे सिंदूर, लौंग व इलायची रखनी चाहिए। जिस के पास गीदड सिंगी होती है उसे आने वाली दुर्घटना या शुभ घटना की सत्य सूचना स्वप्न में प्राप्त हो जाती है। ऐसे व्यक्ति के घर में सदैंव लक्ष्मी का वास रहता हैं, उसके नाम की विजय पताका फहराती हैं तथा कोई संकट भी उसे छू नही सकता। सिंयारसिंगी के अन्य तंत्र-टोटकेः 1. वंद्गाीकरण प्रयोगः 'क्क नमः नर-मादा सिंयारसिगायः अमुक मम वद्गय कुरू-कुरू स्वाहाः। जिस स्त्री पुरूष को अपने वद्गा में करना हो तब अमुक के स्थान पर इच्छित व्यक्ति का नाम आक के पते पर लिखकर सिंयारसिगी को उसके ऊपर रखे। उपरोक्त मंत्र का जाप 108 बार कर के फूंक मारें। मंत्र जाप के समय अमुक के स्थान पर नाम का प्रयोग अवद्गय करें। सियारसिंगी को डिब्बी में बन्द करके लौंगइलायची के साथ रखें। दूसरे दिन सामने वाले व्यक्ति को डिब्बी में रखी लौंग इलायची खिला दिया जाय तो वह व्यक्ति चाहे वह स्त्री हो या पुरुष या सरकारी अधिकारी, या कितनी ही कठोर हृदय वाली स्त्री, पूर्णरूप से आपके वश में होगा। यह चमत्कारी प्रयोग पति-पत्नी पर, गृह क्लेद्गा से परेद्गाान परिवार पर कर के लाभ उठायें, तलाक एवं आत्म हत्या जैसी समस्याओं का गारण्टी से इलाज संभव है। योग्य व्यक्ति साक्षात्कार एंव प्रतियोगिता में भी प्रयोग करके उचित लाभ प्राप्त कर सकता हैं।

2 धनवृद्वि के लिएः-क्क नमः नर-मादा सिंयारसिगाय मम् घर धन वर्षा कुरू-कुरू स्वाहाः' इस मंत्र का प्रयोग ऋण-मुक्ति एंव धन वृद्धि करने में सक्षम होता है। पूजा स्थल पर डिब्बी का ढक्कन खोल कर आक के पते पर अपना नाम लिखकर रखें। दीपावली की रात्रि को जब तक नीदं आये तब तक उपरोक्त मंत्र का एक रूद्राक्ष माला से दक्षिणावर्ती शंख के सामने जाप कर फूंक मारें, ऐसा करने से लक्ष्मी की अपार कृपा होगी। साधक के घर धनवर्षा होने लगेगी, व्यापार स्थल पर रखने पर बन्द व्यापार भी चलने लग जाता है। स्थाई लक्ष्मी की चमत्कारी कृपा बनी रहती है। यह प्रयोग सभी साधक कर सकते है। रवि-पुष्य, गुरु-पुष्य नक्षत्र योग में भी यह प्रयोग सम्पन्न किया जा सकता है।

3-द्गारीर सुरक्षा के लिएः-नमः सियांरसिगाय मम् स्वरक्षा कुरू-कुरू स्वाहा इस मंत्र की साधना साधक को अपनी सुरक्षा हेतु करनी चाहिए। जंगल में किसी एकान्त स्थान पर जाकर उतरामुखी बैठकर 108 बार धूप-दीपक के साथ सियारसिंगी को अभिमंत्रित करे शत्रु एंव भुत-प्रेत भय, एक्सीडेन्ट और असाध्य रोग से सुरक्षा बनी रहती है। साधक की दीर्घायु होकर हमेद्गाा सुखी जीवन बना रहता है। यह शरीर के सुरक्षा कवच का काम करती है। उच्चाटन एंव तांत्रिक क्रियाओं का प्रकोप नही होता हैं, साधक को अनायास भय से तुरन्त मुक्ति मिलती है। यह प्रयोग स्त्री या पुरूष कोई भी साधक कर सकता है।

प्रकाशन तिथि: 25 जनवरी, 2012   
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