महंगा पड़ सकता है तेज संगीत आईपॉड्स और सेल फोन के
जरिए
तेज संगीत सुनने वालों की श्रवण शक्ति बाधित हो रही है। राजधानी के डॉक्टरों का कहना है कि कानों में जाता तेज संगीत सुनने की क्षमताओं को प्रभावित कर रहा है। उनके अनुसारम्यूजिक फ्रीक्वेंसी का ध्यान न रखने के कारण इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है।
आईपॉड्स और म्यूजिक एडिशन वाले मोबाइल लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं, लेकिन वे इनसे होने वाली समस्याओं से अनजान हैं। डॉक्टरों के अनुसार शहर में कम सुनाई देने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
अस्सी डेसिबल से ऊपर खतरनाक नाक, कान, गला विशेषज्ञ डॉ. अमित गांगुली कहना है कि लोग ८क् डेसिबल की जगह 110 से 120 डेसिबल संगीत सुनना पसंद करते हैं जो बहुत ही खतरनाक है। उनका कहना है कि बहुत हाई डेसिबल पर संगीत सुनने से सुनाई देने में परेशानी होने के साथ नाइस इन्डियुस्ड हियरिंग लॉस (एनएचआईएल) भी आम हो चला है।
क्या कहती है रिसर्च हाल ही में आई यूनिवर्सिटी ऑफ कोलाडरे की एक रिसर्च के अनुसार हेडफोन्स के प्रकार पर यह निर्भर करता है कि उसका उपयोग कितनी देर तक लगातार किया जा सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार व्यक्ति 80 डेसीबल से कम आवाज पर संगीत सुन सकता है यदि इससे ज्यादा तेज आवाज रखते हैं तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। उनके अनुसार इयरबड्स हेडफोन डेढ़ घंटे तक, साउंड आइसोलेटिंग हेडफोन 50 मिनट तक, कान को ढंककर रखने वाले हेडफोन पांच घंटे तक सुना जा सकता है। यही नहीं शोधकर्ताओं का कहना है कि अधिकतम साउंड के 70 प्रतिशत से कम पर आप संगीत सुनते हैं तो यह स्वास्थ्य के लिए ठीक होगा।
20 से 30 आयु वर्ग के रोगी ज्यादा विशेषज्ञ परेश टंकवाल का कहना है कि उनके पास आने वाले रोगियों में 20 से 30 वर्ष के युवा ज्यादा आते हैं। हेडफोन्स और इयरबड हेडफोन्स के उपयोग के कारण ध्वनि तरंगे सीधे व तेज गति के साथ कान में पहुंचती हैं। इससे कान के परदे और तंत्रिकाओं पर प्रभाव पड़ने लगता है, जिससे व्यक्ति को सुनने में दिक्कत आने लगती है।