अमिताभ बच्चन - बॉलीवुड का बाप!
राज कपूर, दिलीप कुमार, राजेन्द्र कुमार, राजेश खन्ना,
शत्रुघ्न सिन्हा, मिथुन चक्रवर्ती, अनिल कपूर, सलमान, आमिर, शाहरुख़, अक्षय, अजय देवगन, गोविंदा, ऋतिक, नील नितिन मुकेश, और बहुत से नए कलाकार। फेहरिस्त और भी लम्बी है और बढती जायेगी पर एक नाम है जो शायद जस का तस है "
अमिताभ हरिवंश राय बच्चन" जिसे कोई 'कुमार', कोई 'खान' और कोई 'कपूर' बॉलीवुड की बादशाहत की कुर्सी से डिगा नही पाया है। ना जाने क्यों इतने अच्छे-अच्छे कलाकार जब अमिताभ के साथ काम करते हैं या खड़े होते हैं तो तुलना करना अतिशयोक्ति लगती है। कद ऊंचा होने के साथ-साथ उनका बड़प्पन, उनकी सादी जीवनशैली, जमीन से जुड़े रहना, उनकी नेक नियत, सादा स्वभाव और मृदुभाषी होना उन्हें और भी बड़ा बना देता है। ताज्जुब नही की अगर मीडिया उन्हें 'बॉलीवुड का शहंशाह' या 'बॉलीवुड का बाप' कहे।
शायद आपको पता न हो अमिताभ का नाम 'इन्कलाब' रखा गया था, तब भारत गुलाम था। बाद में इसे बदल कर अमिताभ कर दिया गया। उनका उपनाम श्रीवास्तव था पर उनके पिता स्व. हरिवंश राय बच्चन ने 'बच्चन' जोकि उनकी कृतियों में प्रयोग होता था उसे ही अन्तिम नाम बनाया। उनकी पढाई इलाहबाद, नैनीताल की शेरवुड कॉलेज, दिल्ली के किरोडीमल कॉलेज में हुई। बाद में वे कलकत्ता नौकरी हेतु चले गए।
उद्घोषक की नौकरी के लिए उनकी आवाज को आल इंडिया रेडियो ने नाकाबिल करार दिया। प्रसिद्ध रेडियो प्रस्तुतकर्ता अमीन सायानी ख़ुद यह बात मानते हैं। अपने संघर्ष के दिनों में वे सात वर्षो तक हास्य कलाकार महमूद के घर पर रहे।
उनकी पहली फ़िल्म ख्वाजा अहमद अब्बास की 'सात हिन्दुस्तानी' थी। १९७३ में प्रकाश मेहरा की 'जंजीर' से उन्हें पहचान मिली जिसने अमिताभ को 'एंग्री यंगमैन' की राह पर चलाया और वे एक 'एक्शन हीरो' बन गए। इसी वर्ष उनका जया से विवाह हुआ। उनके दो बच्चे, अभिषेक और श्वेता हुए, अभिषेक आज एक सफल हीरो हैं। उनकी काफ़ी फिल्मे सफल हुई, सलीम-जावेद की कहानी में वे एकदम फिट थे। दीवार, काला पत्थर, मिस्टर नटवरलाल, कालिया, कुली, शोले, नमक हलाल, लावारिस, मर्द आदि। १९८२ में कुली की शूटिंग के वक़्त उन्हें आंतो में चोट लगी, सारे देश ने उनके लिए प्रार्थना की। वे मायिस्थीनिया ग्रेविस का शिकार हो गए और कुछ समय के लिए राजनीति में चले गए।
फ्लॉप फिल्मे, निराशा, बोफोर्स काण्ड, बतौर निर्माता बिज़नस में घाटा, ABCL में नुक्सान आदि उनका सबसे बुरा दौर था और एक वक़्त उन्हें अपना बंगला गिरवी रखना पड़ा। उनका करियर 'मोहब्बतें' फ़िल्म से दोबारा ट्रैक पर आया। उसके बाद वे फिर से बॉलीवुड पर राज करने लगे। एक वक़्त जब वें उरूज पर थे तब Stardust आदि ने उनपर १५ वर्षो का प्रतिबन्ध लगा दिया था। रेखा से उनके रिश्ते पर खुसुर पुसुर से वे खफा थे। फ़िल्म फेयर ने जब रेखा को ' लाइफटाइम अचिएवेमेंट अवार्ड' दिया तो रेखा ने सबका धन्यवाद दिया सिवाय अमिताभ के।
उन्होंने तीन राष्ट्रीय पुरस्कार और बारह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते हैं। उनके नाम सर्वाधिक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता फिल्मफेयर अवार्ड का रिकार्ड है। अभिनय के अलावा अमिताभ ने पार्श्वगायक, फिल्म निर्माता, टीवी प्रस्तोता और भारतीय संसद के एक निर्वाचित सदस्य भी रहे हैं। २००५ में उन्हें आंतो की समस्या के वजह से हॉस्पिटल में भरती किया गया।
बतौर निर्माता उनकी फिल्मे हैं - तेरे मेरे सपने, उलासाम, मृत्युदाता, मेजर साब, अक्स, विरूद्ध, परिवार -- टायस ऑफ़ ब्लड.
बतौर पार्श्व गायक उनकी फिल्मे हैं - द ग्रेट गैम्बलर, मि० नटवरलाल, लावारिस, नसीब, सिलसिला, महान, पुकार, शराबी, तूफान, जादूगर, खुदागवाह, मेजर साब, सूर्यवंशम, अक्स, कभी ख़ुशी कभी , आंखें, अरमान, बागबान, देव, एतबार, बाबुल, निशब्द, चीनी कम, भूतनाथ इत्यादि
अमिताभ की फिल्मे;-
सात हिन्दुस्तानी
परवाना
आनंद
रेश्मा और शेरा
गुड्डी
प्यार की कहानी
संजोग
बंसी बिरजू
पिया का घर
एक नज़र
बावर्ची
रास्ते का पत्थर
बॉम्बे टू गोवा
बड़ा कबूतर
बंधे हाथ
ज़ंजीर
गहरी चाल
अभिमान
सौदागर
नमक हराम
कुँवारा बाप
दोस्त
कसौटी
बेनाम
रोटी कपड़ा और मकान
मजबूर
चुपके चुपके
फरार
मिली
दीवार
ज़मीर
शोले
दो अनजाने
छोटी सी बात
कभी कभी
हेराफेरी
आलाप
चरणदास
अमर अकबर एंथोनी
शतरंज के खिलाड़ी
अदालत
इमान धर्म
खून पसीना
परवरिश
बेशरम
गंगा की सौगंध
कसमें वादे
त्रिशूल
डॉन
मुकद्दर का सिकंदर
द ग्रेट गैम्बलर
गोलमाल
जुर्माना
मंज़िल
मि० नटवरलाल
काला पत्थर
सुहाग
दो और दो पाँच
दोस्ताना
राम बलरामशान
चश्मेबद्दूर
कमांडर
नसीब
बरसात की एक रात
लावारिस
सिलसिला
याराना
कालिया
सत्ते पे सत्ता
बेमिसाल
देश प्रेमी
नमक हलाल
खुद्दार
शक्ति
नास्तिक
अंधा क़ानून
महान
पुकार
कुली
इंकलाब
शराबी
गिरफ्तार
मर्द
एक रूका हुआ फैसला
आखिरी रास्ता
जलवा
कौन जीता कौन हारा
सूरमा भोपाली
शहंशाह
हीरो हीरालाल
गंगा जमुना सरस्वती
बंटवारा
तूफान
जादूगर
मैं आज़ाद हूँ
अग्निपथ
क्रोध
आज का अर्जुन
हम
अजूबा
इन्द्रजीत
अकेला
खुदागवाह
इन्सानियत
तेरे मेरे सपने
मृत्युदाता
मेजर साब
बड़े मियाँ छोटे मियाँ
लाल बादशाह
सूर्यवंशम
हिंदुस्तान की कसम
कोहराम
हैलो ब्रदर
मोहब्बतें
एक रिश्ता
लगान
अक्स
कभी ख़ुशी कभी ग़म
आंखें
हम किसी से कम नहीं
अग्नि वर्षा
कांटे
खुशी
अरमान
मुंबई से आया मेरा दोस्त
बूम
बागबान
फ़नटूश
खाकी
एतबार
रूद्राक्ष
इंसाफ
देव
लक्ष्य
दीवार
क्यूं...!हो गया ना
हम कौन है
वीर - जारा
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
ब्लेक
वक़्त (Waqt)
बंटी और बबली
परिणीता
पहेली
सरकार
विरूद्ध
रामजी लंदनवाले
दिल जो भी कहे
एक अजनबी
परिवार
डरना जरूरी है
कभी अलविदा न कहना
बाबुल
Eklavya
निशब्द
चीनी कम
शूटआउट एट लोखंडवाला
झूम बराबर झूम
राम गोपाल वर्मा की आग
ओम शांति ओम
द लास्ट लियऱ
यार मेरी जिंदगी
भूतनाथ
सरकार राज
गोड तुस्सी ग्रेट हो
जमानत
अलादीन
जिन
तालिसमान
(इनमे कुछ फिल्मे रिलीज़ नही हुई हैं व् कुछ में अमिताभ ने बतौर Narrator अपनी आवाज दी है )