फिल्में, धर्म और राजनिती
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प्रकाशन तिथि: अक्तूबर 16, 2006
डा विंची कोड को विश्व की कई देशों में प्रतिबंधित कर दिया गया है ।क्या इस फिल्म के प्रर्दशन पररोक लगाना उचितहै ? क्या यह ईसा मसीह के चरित्र को बदनाम करता है ? अगर हां, तो इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिए । मैने इस फिल्म के बारे में अपने कई विदेशी दोस्तों से पूछा क्योंकि इसे मेरे शहर में प्रतिबंधित कर दिया गया था । कैथोलिक होने पर भी, उनका यह पक्का विश्वास था कि इस फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं हैजिसके लिए इसफिल्मको प्रतिबंधितकिया जाए । भारत में भी कई लोगों के द्वारा विरोध दर्ज कराया गया जिसमें सरकार से मांगा गया किडा विंची कोड के प्रर्दशन को रोक दिया जाए । उच्चतम न्यायालय के द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के बाद भी, कई राज्यों ने इस फिल्म को प्रतिबंधित कर दिया । उन फिल्मों का क्या जिनमों हिंदुओं के देवी देवताओं का अपमान किया जाता है ?ऐसी फिल्मों को प्रतिबंधित करने के लिए कभी भी विरोध दर्ज नहीं कराया गया । किसी भी सरकार ने ऐसी फिल्मों के उपर प्रतिबंधित नहीं लगाया गया । तो भी, इनमें से कई फिल्में हिट रहीं हैं । क्या डा विंची कोड को सरकार की अपनी पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि बनाने के लिए प्रतिबंधित किया गया है ? लगता तो ऐसा ही है । फिर भी ऐसी कई फिल्में हैं जो अश्लीलता, आतंक और हिंसादिखा कर समाज का नुकसान कर रही है । विशेषज्ञों का मत है कि, ऐसी फिल्मों का प्रर्दशन ही नहीं किया जाना चाहिए । फिर भी ऐसी फिल्मों का प्रर्दशन बार बार किया जा रहा है । ऐसी कई फिल्में आई हैं जिसमें अशक्तता का मजाक उडाया जा रहा है । क्या ऐसी फिल्में उन लोगों की भावनाओं को दुख नहीं पहुचाँती जो असल जिंदगी में इन अशक्तताओं से पीडित होते हैं ? सिनेमा मनोंरंजन के साथ सूचना पाने का माध्यम भी है । इसे लोगों का मनोरंजन करना चाहिए पर उनकी भावनाओं को दुख नहीं पहुँचाना चाहिए । उसे संदेश देना चाहिए, पर लोगों के दिमाग को बिगाडना नहीं चाहिए । इसके सिवाय, फिल्म निर्माताओं को रचनात्मकता के नाम पर नैतिकता से समझौता नहीं करना चाहिए ।