एंकर टेलीवीजन के परदे पर पहले-पहल किसी खबर की सूचना देता है,उसके बारे में बताता है कि घटनाक्रम किस प्रकार घटित हुआ।। वास्तव में किसी महत्वपूर्ण खबर के दौरान दर्शकों के लिए यह मह्तवपूर्ण नहीं होता कि वे कौन-सा चैनल देख रहे हैं, वह महत्त्वपूर्ण खबर जिस भी चैनल पर आ रही होती है दर्शकों का रिमोट उसी पर ठहर जाता है। ऐसे में किसी भी समाचार चैनल के लिए एंकर और रिपोर्टर बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि दर्शकों को चैनल से जोड़ने का काम वही करते हैं। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि एंकर और रिपोर्टर हर परिस्थिति को सँभालने में माहिर हों।
पुण्य प्रसून बाजपेयी ‘आजतक’ के प्रमुख एंकर है। पेशे के रूप में एंकर-रिपोर्टर का काम क्या होता है,उसकी भूमिका क्या होती है, उसका काम कितना चुनौतीपूर्ण होता है- पुण्य प्रसून ने इन्हीं पहलुओं को विभिन्न कोणों से इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक टी.वी.पत्रकारिता सीखनेवालों के लिए उपयोगी है.
टी.वी. चैनल देखनेवाला दर्शक पहले से यह सोचकर नहीं बैठता कि ‘एनडीटीवी’ देखें या ‘आजतक’ देखें या ‘चैनल सेवन’ देखें या इंडिया टी.वी.’ देखें। दर्शकों के लिए खबरें महत्त्व रखती हैं। कम-से-कम भारत में खबरों का प्रोग्रामिंग के जरिए टी.वी. चैनल से जुड़ने की प्रक्रिया नहीं है। क्योंकि ऐसा कोई भी चैनल नहीं है जो अपने आप में सम्पूर्ण हो। इस अर्थ में हर चैनल एक-दूसरे के पूरक की तरह काम करता है। दर्शक को अगर किसी खबर में दिलचस्पी होती है तो वह हर चैनल पर उसे देखता है। चैनल उसकी उँगलियों पर होता है और वह उनको सर्फ करते हुए आगे बढ़ता है। मान लीजिए अच्छे डिस्कशन ‘एनडीटीवी’ पर आते हैं और आप डिस्कशन देखना चाहते हैं तो आप केवल ‘एनडीटीवी’ ही देखें। हो सकता है ‘सीएनबीसी’ पर बहुत अच्छा डिस्कशन आ रहा हो, ‘स्टार’ पर आ रहा हो। आप अगर टी.वी. न्यूज़ के दर्शक हैं तो आप किसी एक चैनल से बँधकर नहीं रह सकते। यह टी.वी. की सच्चाई है।
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