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मैं ''ऐंग्री यंग मैन'' नहीं: अमिताभ

Summary rating: 5 stars 1 समीक्षा
लेखक : वी राधिका
Summary by : ginius
विजिट्स: 13
शब्द: 900
प्रकाशन तिथि: मार्च 30, 2008
''मिलेनियम स्टार'' अमिताभ बच्चन सत्तर के दशक में ख़ुद को मिले ''ऐंग्री यंग मैन'' के ख़िताब से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि भूमिकाएँ उन्होंने ख़ुद नहीं चुनीं और जो भी किरदार मिला, उसे निभाते चले गए.
टोरंटो फ़िल्म समारोह में आए अमिताभ ने बीबीसी को दिए ख़ास इंटरव्यू में कहा कि ''ऐंग्री यंग मैन'' के ख़िताब से वह इसलिए भी सहमत नहीं हैं कि जिस दौर के लिए उन्हें यह ख़िताब दिया गया, उसी दौर में अगर ''दीवार'' बनी तो उन्होंने ''चुपके-चुपके'' में भी काम किया.
उन्होंने कहा, "मैने ‘ज़ंजीर’ में गंभीर किरदार निभाया तो ‘अमर-अकबर-एंथनी’ में कॉमेडी भी की.”
अमिताभ कहते हैं, "ज़ाहिर है उम्र के इस पड़ाव पर तो मुझे ऐसी भूमिकाएँ नहीं मिल सकतीं, लेकिन इस दौर में भी अगर किसी भूमिका में मुझे आक्रोश दिखाना हो तो दिखाऊँगा और कॉमेडी करनी हो तो करूँगा."
स्टार पावर नहीं







 मैं ख़ुशकिस्मत हूँ कि इस उम्र में भी मुझे काम मिल रहा है. जहाँ तक मुख्य किरदार मिलने की बात है, इस बारे में तो वही बता सकते हैं, जो मुझे काम देते हैं
 
अमिताभ

''बॉलीवुड का शहंशाह'' नहीं मानता कि इस उम्र में भी उसे मिल रही केंद्रीय भूमिका के पीछे उसकी ‘स्टार पावर’ है.
वो कहते हैं, "मैं ख़ुशकिस्मत हूँ कि इस उम्र में भी मुझे काम मिल रहा है. जहाँ तक मुख्य किरदार मिलने की बात है तो इस बारे में तो वही बता सकते हैं, जो मुझे काम देते हैं."
अमिताभ कहते हैं, "अपने 40 साल के लंबे फ़िल्मी करियर के दौरान मुझे कई युवा और अनुभवी निर्देशकों के साथ काम करने का अनुभव मिला है. मेरा मानना है कि हर एक के साथ काम करने का अलग आनंद है."
युवा निर्देशकों के बारे में अमिताभ कहते हैं, "नई पीढ़ी को प्रोत्साहित करना चाहिए. यही पीढ़ी देश को राजनीति, कला, खेल और समाज में आगे ले जाएगी."
अमिताभ इस बात से सहमत नहीं हैं कि साल में सैकड़ों फ़िल्में बनने के बावजूद भारतीय फ़िल्म उद्योग हॉलीवुड सरीखा मुकाम हासिल नहीं कर सका है.
बॉलीवुड भारी








अमिताभ ने सवाल किया है कि भारत में हॉलिवुड अभिनेताओं को कौन पूछता है
वो कहते हैं, "देखिए भाषा की अपनी पाबंदियां होती हैं. चूँकि अंग्रेज़ी भाषा आमतौर पर दुनियाभर में बोली-सुनी जाती है, इसलिए इसे प्राथमिकता मिलना स्वाभाविक है. लेकिन आंकड़ों के आगे हॉलीवुड की फ़िल्में बॉलीवुड के आगे कहीं नहीं टिकती."
उन्होंने कहा, "जहाँ तक एक्टरों के मशहूर होने का सवाल है तो मैं कहूँगा कि अगर भारतीय अभिनेताओं को यूरोप या अमरीका में लोग नहीं पहचानते तो, हॉलीवुड स्टार्स की भी भारत में पूछ कहाँ है."
रितुपर्णो घोष निर्देशित अपनी पहली अंग्रेजी फ़िल्म ‘द लास्ट लियर’ के बारे में अमिताभ कहते हैं, "ये ठीक है कि ये मेरी पहली अंग्रेजी फ़िल्म है, लेकिन ज़्यादा तैयारी मुझे नहीं निर्देशक को करनी पड़ी."
वो कहते हैं, "वैसे भी कलाकार को अलग-अलग तरह की भूमिकाएँ तो निभानी ही पड़ती हैं. भाषा से ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता."
भूमिका







 जहाँ तक एक्टरों के मशहूर होने का सवाल है तो मैं कहूँगा कि अगर भारतीय अभिनेताओं को यूरोप या अमरीका में लोग नहीं पहचानते तो, हॉलीवुड स्टार्स की भी भारत में पूछ कहाँ है?
 
अमिताभ

इस फ़िल्म में अमिताभ ने एक वरिष्ठ रंगमंच कलाकार की भूमिका निभाई है, जिसकी जिंदगी का सबसे बड़ा सपना है कि वो ‘किंग लियर’ का चरित्र निभाए.
अमिताभ के साथ इस फ़िल्म में प्रीति जिंटा भी हैं. प्रीति एक कमज़ोर कलाकार की भूमिका निभा रही हैं.
फ़िल्म में काम करने के अनुभव के बारे में वो कहते हैं, "ये सही है कि स्कूली दिनों में मैं अंग्रेज़ी नाटक किया करता था. मैने शेक्सपीयर को भी पढ़ा है और स्टेज पर इसका मंचन भी किया है. मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे थिएटर और फ़िल्म दोनो में काम करने का मौका मिला."
अमिताभ अगले साल जुलाई में अभिषेक, ऐश्वर्या राय, अक्षय कुमार, रितेश देशमुख के साथ टोरंटो से ही वर्ल्ड टुअर शुरू करेंगे.
अमिताभ कहते हैं, "दरअसल, टोरंटो की जनता से मुझे अपार स्नेह और सम्मान मिला है. यही वजह है कि हमने वर्ल्ड टूर की शुरुआत इस शहर से करने का मन बनाया है."
 
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