फिल्म ''तारे जमी पर''..नई आशा की किरण!
इस फिल्म की कहानी बिलकुल ही नयापन लिए हुए है. साथ ही यह सामाजिक शिक्षा की
तरफ भी अपना फर्ज निभाने का कार्य कर रही है.
कहानी आठ साल के ईशान की है, जो एक ऐसे
विकार से पीडित है जिसे
डिस्लेक्सिया कहतें है. इस विकार से पीड़ित बच्चों में शब्दों कों पहचाननें, वाक्य को अर्थ का स्वरुप प्रदान करने या उच्चारण याद करने की क्षमता नहीं होती; ईशान ऐसा ही एक बच्चा है. उसे उसके
माता-
पिता समझ नही पाते और नटखट-शरारती समझ कर उसे बोर्डिंग में भेज देते है. वहां एक टीचर इस बच्चें की समस्या पहचान लेता है और कहानी सकारात्मक अंत की तरफ बढ़ती चली जाती है.
यह पढ़ाई से सबंधित विकार तीन से पंद्रह साल के बच्चों में अधिकतर पाया जाता है. ऐसे बच्चों पर खास ध्यान
दिया जाए तो ये बहुत अच्चे अंको के साथ उत्तीर्ण हो सकतें है.
भारत का जाना-माना, मनोचिकित्सा के लिए प्रसिद्ध अस्पताल विमहांस के वरिष्ट मनोचिकित्सक डॉ.जितेन्द्र नागपाल के अनुसार ''तारे जमीं पर'' फिल्म से, डिस्लेक्सिया विकार से पीड़ित बच्चों के माता-पिता को राहत की सांस लेने का संदेश दिया गया है. वैञानिक थॉमस एडिसन, हॉलिवुड अभिनेता टॉम क्रूज, सम्राट अशोक जैसी हस्तियां भी इस विकार से पीड़ित थी...पर अपनी अक्ल होशियारी से प्रसिद्धी के शिखर तक पहुंच गई!
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