यूं तो किस को प्यार का टोकन कहा जाता है लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि यह दो लोगों के बीच स्पेशल केमिस्ट्री स्थापित करता है और बॉडिंग बढ़ाता है। हाल में हुए अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि सेक्सी किस एक खास किस्म के केमिकल को दिमाग में भेजता है इससे कपल ज्यादा उत्तेजित और खुश रहते हैं।
किस के जरिए हारमोन स्थानांतरित होता है
शोधकर्ताओं का कहना है कि किस के दौरान हारमोन मुंह के जरिए एक-दूसरे के शरीर में स्थानांतरित होता है और सेक्स लाइफ को स्पाइसी बनाता है। शोध से यह बात सामने आई है कि किस एक जटिल शारीरिक प्रक्रिया है और इससे बहुत सारे हारमोनल चेंजेज होते हैं जिसपर फिलहाल विशेषज्ञ कार्य कर रहे हैं।
महज दो होठों का स्पर्श नहीं
किस महज दो होठों के स्पर्श का मामला नहीं है बल्कि इससे शरीर के कई हारमोंस का लेवल बढ़ जाता है। इसके कारण दिमाग में इमोशनल रिस्पांस बढ़ जाता है।
शोधकर्ताओं ने युवक युवतियों पर आक्सीटॉनिक हारमोन (एक-दूसरे के करीब आने की इच्छा उत्पन्न करता है) और कोर्टीसोल हारमोन (तनाव पैदा करने वाला हारमोन है) का लेवल किस से पहले और किस के बाद जांचा गया।
पाया गया कि चुंबन के बाद आक्सीटॉनिक का स्तर बढ़ा हुआ था और कोर्टीसोल का स्तर गिरा गया था। रिसर्च जारी है और उम्मीद है कि किस में छुपे प्रेम और सेक्स के कई राज जल्द सामने आ जाएंगे।
स्पर्श बनाता है प्यार को प्रगाढ़
तेरे स्पर्श में है
तूने छूआ तो रोम-रोम खिल गया
भटक रहा था मैं जीवन भँवर में
आज मुझे किनारा मिल गया।
स्पर्श एक ऐसा अहसास है, जिसे शब्दों में बयाँ करना असंभव है। यह मूक है, परंतु बोलने, सुनने और सूंघने की क्रियाओं से कहीं अधिक प्रभावपूर्ण है।
यह हमें किसी के करीब होने का अहसास कराता है। कई बार हम अपने साथी से जो बात कह नहीं पाते है वो हमारे स्पर्श मात्र से ही अभिव्यक्त हो जाती है।
इस दुनिया में संबंध तो बड़े ही आसानी से बन जाते हैं परंतु कभी-कभी उनका अहसास कराना भी जरूरी होता है। हर व्यक्ति अपेक्षा करता है प्यार की। उसकी ख्वाहिश होती है कि उसका साथी बगैर कुछ कहे ही उसकी हर बात समझ जाए। हर उसकी हर तकलीफ में उसका साथ निभाए। ऐसे में स्पर्श सभी तकलीफों का समाधान बन जाता है।
स्पर्श भावनाओं के आदान-प्रदान का एक बेहतर माध्यम है। यह ऊर्जा का संचार है, जो साथी के दिल में आपके प्रति प्यार व विश्वास पैदा करता है और वो इसी विश्वास के सहारे आपको बगैर कुछ शिकायत के अपना तन-मन समर्पित कर देता है।
हर रिश्ते में स्पर्श की आनंदानुभूति संजीवनी के समान होती है। विशेषकर प्यार में तो स्पर्श का बहुत अधिक महत्व होता है। इस रिश्ते में यह अपनेपन का अहसास कराता है। तभी तो प्रेमी-प्रेमिका घंटों एक-दूसरे के हाथ थामकर बैठे रहते हैं।
इसमें उन्हें कोई बोरियत महसूस नहीं होती है। भले ही दुनियावालों को देखने में यह बहुत बुरा लगे परंतु प्रेमियों में यह स्पर्श एक नई ऊर्जा का संचार करता है, जिससे उनका प्यार प्रगाढ़ बनता है।
केवल दोस्ती या प्यार में ही नहीं बल्कि स्पर्श हर रिश्ते को जीवंत बनाता है। स्पर्श भावनाओं के आदान-प्रदान का एक बेहतर माध्यम है। यह ऊर्जा का संचार है, जो साथी के दिल में आपके प्रति प्यार व विश्वास पैदा करता है और वो इसी विश्वास के सहारे आपको बगैर कुछ शिकायत के अपना तन-मन समर्पित कर देता है। स्पर्श दांपत्य संबंधों को भी मधुर बनाता है।
एक अजनबी से जाना-पहचाना होने का अहसास दिलाने वाला स्पर्श ही है। यहीं वो गोंद है, जो रिश्तों को टिकाऊ, मजबूत व प्रगाढ़ बनाता है। इस भाव को जीवित रखकर आप भी अपने रिश्तों को चिरायु बना सकते हैं।
प्रथम स्पर्श
नयनों की आभा पलकों से
छलक, दूजे नयनों में प्रशस्त हुई ।
प्रश्न, उत्तर, प्रतिप्रश्न, प्रत्युत्तर
प्रति-स्मिता में परिणत हुई ।
ना-हाँ-शायद-अवश्य,
संशय के गुजरे क्षण-विशेष ।
तितलियों की परस्पर भाषा से
प्रेमसिक्त हुए दृग अनिमेष ।
दो-युग्म कदमों की उलटी दिशा
दो प्राण परस्पर निकटस्थ हुए ।
फिर हाँ, फिर ना, फिर संकोच,
दो अधर पुनः आश्वस्त हुए ।
उन्नत मुख, झुकी पलकों की
भाषा पढ़ी उत्सुक उर ने ।
तीव्र सांसों का फिर संग दिया
हृदय के तीव्रतर स्वर ने ।
काँपते, अधखुले होठों से
प्रेयसी ने कुछ कहा ना, पर,
प्रियतम के आकुल आँखों ने
पढ़ लिये प्रिया-समर्पण के स्वर ।
वक्षों पे प्रथम स्पर्श, निकले
प्रिया-कंठ से सिसकी बनकर ।
मधुर आह को गिरने से प्रिय ने
रोका अधरों पे अधर धर कर ।
सतः – कौमार्य - सिक्त होठों पे
प्रियतम के होठों का प्रथम स्पर्श ।
व्यग्र तन, त्यों संतृप्त हो,
हो गया स्वतः प्रशांत सहर्ष ।।