व्यंग्य- विद्यार्थी का अर्थ
चिंतालाल गृहकार्य करने में अपने पोते की सहायता कर रहे
थे। पोता हिंदी की कॉपी में शब्दों के संधि-विच्छेद व उनके अर्थ लिख रहा था। गणेश = गण+ईश अर्थात गणों के भगवान... हिमालय = हिम+आलय अर्थात बर्फ़ का घर... विद्यार्थी = विद्या+अर्थी अर्थात विद्या की अर्थी निकालने वाला... पढ़ते पढ़ते चिंतालाल मुस्कुराने लगे। पोते की समझ पर उन्हें हंसी आने लगी। "यह क्या है"? तुझे किसे बताया कि विद्यार्थी का अर्थ यह होता है? चिंतालाल ने पोते से पूछा।
इसमे किसी को बताने की क्या ज़रूरत है? परसों मैने अख़बार में पढ़ा था कि नकल करने से रोकने पर कुछ छात्रों ने अपने शिक्षक को पीट दिया, कल पढ़ा कि अपने शिक्षक को तंग करने के लिये छात्रों ने पूरे कॉलेज आपत्तिजनक पोस्टर चिपका दिये। अभी थोड़ी देर पहले ही टेलिविज़न पर देखा कि कुछ छात्रों ने कॉलेज से निकाले जाने पर कुलपति का विरोध कर रहे हैं और पढ़ाई नहीं होने दे रहे हैं। ये सब ख़ुद को विद्यार्थी कहते हैं, अब आप ही बताइये क्या ये सब विद्या की अर्थी नहीं निकाल रहे हैं?
पोते की समझ पर हंसने वाले चिंतालाल आजकल की शिक्षा व्यवस्था व पोते की विश्लेषण क्षमता देख चकित रह गए। फिर भी पोते को समझाना ज़रूरी था सो बोले "बेटा विद्यार्थी का अर्थ यह होता है विद्या को चाहनेवाला अर्थात...
"दादाजी..." पोता बीच में टोकते हुए बोला "हमारे स्कूल के छात्र तो आयशा, कैटरीना को चाहते हैं और लड़कियाँ सलमान, शाहिद चाहती हैं । विद्या को तो कोई नहीं चाहता क्योकि हमारे स्कूल के छात्रों को वो स्टाइलिश नहीं लगती।
"अरे... अरे.." चिंतालाल झल्लाते हुए बोले "बेवकूफ लड़के! विद्या किसी लड़की का नाम नहीं है। विद्या यानी ज्ञान... एजुकेशन... समझे? चिंतालाल ने पोते को समझाने की भरपूर कोशिश की। तभी
अख़बार पढ़ती चिंतालाल की पत्नी बोली "कुछ पढ़ा आपने? आठवीं कक्षा का एक छात्र अपनी ही कक्षा की विद्या नाम की एक लड़की से प्रेम कर बैठा, जब विद्या ने उसके ने उसके प्रेम को नकार दिया तो उसने कक्षा में ही ब्लेड से अपने हाथ की नसें काट ली। स्कूल वाले तुरंत उसे अस्पताल ले गए... बड़ी मुश्किल से जान बची। उफ! ये आजकल के बच्चे... फिल्मों का कुछ ज़्यादा ही असर हो गया इन पर...
पोता मुस्कुराते हुए बोला "लो दादाजी कोई तो है जो विद्या चाहता है और उस के लिये अपनी अर्थी निकालने को भी तैयार है।
चिंतालाल चिंतामग्न थे।