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चिन्तालाल की किताब

द्वारा : SThap     

लेखक : Saroj Rawat



चिन्तालाल की किताब




सोसायटी में ख़बर फैली थी कि चिन्तालाल किताब लिख रहे हैं और वो भी  अंग्रेज़ी में। उनके परिवार के लोग अपने मित्रों और जाननेवालों को बताते कि किस प्रकार चिन्तालाल पूरे दिन स्टडी रूम में बैठे लिखते रहते हैं। हर किसी की ज़बान पर चिन्तालाल के ही चर्चे थे। कुछ लोग कहते कि वे किसी गंभीर मुद्दे पर लिख रहे हैं तभी सारा दिन चिंतन करते रहते हैं तो कोई कहता कि वे अपनी आत्मकथा लिख रहे हैं तभी अकेले बैठ कर अपने बीते दिनों का पुनःस्मरण कर रहे हैं। एक दिन सोसायटी की पत्रिका के लिए एक महिला पत्रकार उनका इंटरव्यू लेने पहुँच गई। "समय नहीं है" कहते हुए पहले तो उसे टाला गया लेकिन आखिरकार चिन्तालाल इंटरव्यू देने को मान ही गए। कुछ दिनों बाद में कुछ इस प्रकार छपा।
प्रः आपकी किताब का विषय क्या है?
उः  कुछ लिखने के लिए विषय की क्या ज़रूरत है? जो भी लिखो उसकी भाषा मसालेदार होनी चाहिए, विषय लोग ख़ुद ब ख़ुद ढूँढ लेते हैं।
प्रः आपको किताब लिखने की प्रेणना कहाँ से मिली?
उः एक किताब के बहुत चर्चे  सुने हैं हैरी पॉटर। सुना है इस किताब की लेखका बहुत गरीबी में दिन गुज़ार रही थी लेकिन किताब लिखते ही उसकी किस्मत बदल गई। अपनी फाइनेन्शियल हालत भी इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रही तो सोचा शायद किताब से हमारी किस्मत भी बदल जाए।
प्रः आप ये किताब अंग्रेजी़ में क्यों लिख रहे हैं जबकि हमारे मुल्क के अधिकांश लोग हिंदी समझते और पढ़ते हैं?
उः असल में तो हमारे मुल्क के अधिकांश लोग अंग्रेजी़ ही पढ़ना चाहते हैं लेकिन उनकी मजबूरी है कि वे केवल हिंदी  या क्षेत्रिय भाषा  ही जानते हैं। दूसरी बात यह है कि हिंदी किताबें सिर्फ पढ़ने के काम आती हैं जबकि अंग्रेजी़ किताबें पढ़ने के साथ साथ लाईब्रेरी में सजाने के भी काम आती हैं। हो सकता है मेरी किताब को बुकर प्राईज़ भी मिल जाए। हिंदी भाषा में इतनी संभावनाएं कहाँ हैं।
प्रः किताब की पब्लिसिटी करने के लिए आपकी क्या योजना है?
उः जी हाँ किताब की पब्लिसिटी तो बहत ज़रूरी है। मैं इसे किसी अंग्रेजी़नुमा राईटर से रिलीज़ करवाउंगा। सोच रहा हूँ अपनी पत्नी को तलाक देकर किसी युवा कन्या से विवाह कर लूं और अपने निजी जीवन को सार्वजनिक कर दूं क्योंकि देखा गया है कि एक राइटर के जीवन में जितनी अधिक महिलाओं का आना जाना रहता है उसकी  किताब भी उतनी ही सफल रहती है। इसके अलावा मैं किताब से होने वाली आय का कुछ भाग जरूरतमंद लोगों को देने की घोषणा कर दूंगा। किताब की बिक्री का हिसाब मेरे और प्रकाशक के अलावा कोई और थोड़े ही रखने वाला है। ऐसे बहुत से जुगाडू़ आईडियास मेरे दिमाग में चल रहे हैं। आप इंटरव्यू थोड़ा जल्दी ख़त्म कीजिए।
प्रः आपको अपनी किताब से क्या उम्मीदें है?
उः मुझे उम्मीद है कि इस किताब से मेरी किस्मत बदलने वाली है। मैं चाहता हूँ कि मेरी किताब बहुत ऊँचे दामों पर बिके।  फिर चाहे कोई इसे पढ़े या ना पढ़े ।
नो मोर क्वेश्चन्स प्लीज़! आई एम बिजी़ इन राइटिंग। थैंक यू।
प्रकाशन तिथि: अगस्त 25, 2008
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