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इंटरनेट का युग

Summary rating: 4 stars 3 समीक्षा
लेखक :
Summary by : garima g
विजिट्स: 714
शब्द: 900
प्रकाशन तिथि: अप्रैल 11, 2006
इंटरनेट का युग
मीडिया जगत की अग्रणी व्‍यावसायिक हस्तियों में से एक श्री रूपर्ट मडॉक ने नवम्‍बर 2005 में समाचार पत्रों के अंधकारमयी भविष्‍य को लेकर भविष्‍यवाणी करते हुए कहा था कि प्रिंट मीडिया इंटरनेट की वास्‍तविकता को अपनाने में असफल रहा हैं. लंदन (यू.के.), न्‍यूयॉर्क (अमेरिका) और सिडनी (ऑस्‍ट्रेलिया) में अपने व्‍यवसाय का प्रसार कर चुके श्री मर्डोक ने एक प्रकाशित साक्षात्‍कार के माध्‍यम से कहा कि ‘’ परंपरागत प्रेस और इंटरनेट आने वाले कई वर्षो तक एक-दूसरे के साथ चलेंगे.’’
श्री मर्डोक ने कहा, ‘’अच्‍छी पत्रकारिता और अच्‍छा रिपोर्ट को कभी कोई खतरा नहीं हो सकता है.’’ किंतु इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि प्रिंट मीडिया के प्रसार क्षेत्र में बहुत कमी आई है. ‘’ उन्‍‍हें अपना अस्तित्‍व बचाने के लिए अपना मूल्‍य बुरी तरह से गिराना पड़ा और अब वे विज्ञापन पर निर्भर होकर रह गए हैं. और निश्चित रूप से यह गंभीर चिंता का विषय है.’’
यह एक सुखद संयोग ही है कि इस वक्‍तव्‍य से दूसरी ओर चेन्‍नई में ‘सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार के विकासात्‍मक आशय’ (Development Implication of Diffusion of Information Technology) पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. क्‍या डिजिटल/इंटरैक्टिव/मल्‍टीमीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव के समक्ष पत्रकारिता अपना महत्त्‍व बनाए रख पाएगी? यह ठीक है, कि अभी भारत में इंटरनेट प्रयोक्‍ताओं की संख्‍या नाममात्र ही है, किंतु सूचना प्रौद्योगिकी का जिस प्रकार से यहां विकास हो रहा है, उसको देखते हुए उपर्युक्‍त संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. क्‍या नया मीडिया आने वाले समय में परंपरागत मीडिया का स्‍थान ले लेगा. क्‍योंकि ब्रिटेन जैसे देशों में तो समाचार प्रदाता वेबसाइटों के प्रभाव के सामने परंपरागत मीडिया पहले ही क्षीण हो चुका है. आने वाले समय के बारे में यद्यपि कुछ कहा नहीं जा सकता, किंतु इतना तय है कि निकट भविष्‍य में परंपरागत और ऑनलाइन मीडिया दोनों सा‍थ-साथ चलेंगे.
इंटरनेट का प्रारंभ कब हुआ ? इंटरनेट को एक संक्षिप्‍त शब्‍द के रूप में 70 के दशक के प्रारंभिक वर्षो में प्रयोग किया जाता था. यह कम्‍यूनिकेशन सर्किट और उनके नियंत्रक सॉफ्टवेयर के लिए प्रयोग किया जाने वाला संक्षिप्‍त शब्‍द (Abbreviation) था. ये कम्‍युनिकेशन सर्किट विभिन्‍न कंप्‍यूटर नेटवर्को को एक साथ जोड़ते थे, जिसमें अमेरिकी सेना की ARPANET( Advanced Research Project Agency Network) प्रणाली शामिल थी. 80 के दशक तक आते-आते इस संपर्क सूत्र का तेजी से विस्‍तार होने लगा और इसमें कई विश्‍वविद्यालयों और अन्‍य अनुसंधान निकायों को भी शामिल कर लिया गया. इसके उपरांत इस शब्‍द को भी एक नया अर्थ मिल गया. इंटरनेट परस्‍पर संयोजित कंप्‍यूटर सिस्‍टम्‍स की एक एकल विशिष्‍ट प्रणाली है. 90 के दशक के प्रारंभ से इंटरनेट का तेजी से विकास हुआ और इसने विश्‍व भर के लाखों प्रयोक्‍ताओं को एक-दूसरे से जोड़ा और व्‍यक्तिगत आधार के अलावा व्‍यावसायिक उद्यमों और सरकारी एजेंसियों को भी एक-दूसरे से जोड़ने की अपनी क्षमता के कारण इंटरनेट अभूतपूर्व रूप से योग्‍यता प्राप्‍त कर चुका है.
इलेक्‍ट्रॉनिक मेल (Electronic mail) अथवा ई-मेल को पहली बार 1972 में प्रस्‍तुत किया गया था. 1976 में क्‍वीन एलिजाबेथ ने अपना पहला ई-मेल भेजा था.
16-18 नवम्‍बर,2005 को ट्यूनिश (ट्यूनीशिया) में आयोजित विश्‍व इंफॉरमेशन सोसायटी शिखर सम्‍मेलन के दूसरे चरण में इंटरनेट के अधिक से अधिक लोकतंत्रीकरण और भूमंडलीकरण पर बल दिया गया, ताकि सूचना प्रौद्योगिकी की इस क्रांति का लाभ एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के दूरस्‍थ क्षेत्रों तक भी पहुंच सके. ट्यूब सम्‍मेलन में इस बात पर सर्वसम्‍मति व्‍यक्‍त की गई कि डिजिटल क्रांति का लक्ष्‍य विभिन्‍न महाद्वीपों के साधनहीन और साधनसंपन्‍न वर्ग के बीच सेतु की भूमिका निभाना होना चाहिए ने कि उनके बीच की खाई को और गहरा करना. संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव श्री कोफी अन्‍नान भी यह संदेश उस साधनसंपन्‍न वर्ग को देना चाहते थे, जो प्रौद्योगिकीय क्रांति पर अपना एकाधिकार समझता है और इसे किसी के साथ बांटना नहीं चाहता. उनका कहना है, ‘’ डिजिटल क्रांति की स्‍वतंत्रता ही उसकी प्राणशक्ति है और आज विश्‍व को उसकी आवश्‍यकता है, ताकि इसके माध्‍यम से आम लोगों की वास्‍तविक क्षमताओं को विकसित किया जा सके.’’
वर्ष 2004 में अमेरिका में इंटरनेट सर्च इंजनों का प्रयोग करने वाले लोगों की संख्‍या तेजी से बढ़ी और ऑनलाइन कार्यो में ई-मेल के बाद इसे दूसरा स्‍थान प्राइज़ हो गया. वर्ष 2005 में 94 मिलियन अमेरिकी वयस्‍क जनसंख्‍या में 63 प्रतिशत लोगों ने सर्च इंजन का प्रयोग किया, जबकि जून 2004 में यह संख्‍या 56 प्रतिशत थी. यह जानकारी 20 नवम्‍बर, 2005 को प्‍यू इंटरनेट और अमेरिकी लाइफ परियोजना ने दी. इन प्रयोगकर्ताओं में साधनसंपन्‍न और सुशिक्षित लोगों तथा ब्रॉडबैंड कनेक्‍शंस रखने वाले लोगों की संख्‍या सर्वाधिक थी. फिर भी ई-मेल अभी भी सर्वाधिक लोकप्रिय इंटरनेट कार्य है, जिसका प्रयोग 77 प्रतिशत जनसंख्‍या द्वारा किया जाता है.
यद्यपि हमारे पास इस बात की सही जानकारी तो नहीं है कि भारत में इंटरनेट सुविधा का प्रयोग करने वालों की संख्‍या कितनी है, किंतु हम यह अवश्‍य जानते हैं कि आने वाले दस वर्षो में यह तकनीक भारतीय जीवन के हर पहलू को प्रभावित करने वाली है. इंटरनेट युग शिक्षा, चिकित्‍सा, संचार, सार्वजनिक सेवा और प्रशासन के लगभग प्रत्‍येक क्षेत्र में महत्त्‍वपूर्ण भूमिका के साथ अपने प्रभुत्‍व का प्रमाण दे रहा है.
इंटरनेट का युग  द्वारा       
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