अपने
भारत महान के बृहत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड हुआ करता है, कल कौनखंड होगा, इसका नाम क्या होगा , हमें क्या लेना देना ! इस समय पिछले कई वर्षों से, बल्कि दशकों से,
पानी की किल्लत से बुरी तरह जूझ रहा है । यह किल्लत इस कदर यहाँ के वासियों की नसों में रच गयी है कि अब रोटी बेटी के संबन्ध पानी की उपलब्धता से संचालित होते हैं । एक गाँव से बेटी का बाप, दूसरे गाँव रिश्ता करने जाता है, तो यह तसल्ली कर लेता है कि बावड़ी, पोखर या नदी जमाई के घर से ज़्यादा दूर तो नहीं है ? दिखा दिखाई पर अब तक तो कोई जोर नहीं रहता था, किंतु अब आंशिक रूप से अनिवार्य हो गया है । अनिवार्य..वह भी आंशिक, जम नहीं रहा ! अनिवार्य बोले तो लड़के वाले बिना लड़की देखे, रिश्ते के लिये
हाँ तो करते ही नहीं, औ..र आंशिक बोले तो वह पूरी लड़की नहीं बल्कि उसकी गठन और ख़ास तौर पर बाँहें देखते हैं । चेहरे का क्या करना ? घर में पानी कोई खूबसूरत चेहरे के जोर से तो आने से रहा, जैसा भी हो ! पानी भर कर लाने के लिये मज़बूत बाँहें और दमदार शरीर की आवश्यकता होती है, वह है तो ठीक वरना अपनी कोमलांगी को बैठाये रहो घर में,
इन्ने तौ राज्जा के मैअल जाणा है के ताने सुना करो ।
अब आप मग़ज़मारी करो कि भारत सरकार 2010 से 2012 तक महाशक्ति के रूप में दुनिया के तमाम देशों को पानी पिला देने का स्वप्न देख रही है, वह किस मुरव्वत में अपने देशवासियों को पानी नहीं पिला पा रही है ?
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