यह एक स्थापित सत्य है कि मनुष्य को उसी चीज की इच्छा अधिक होती है जो उसे आसानी से उपलब्ध नहीं होती। मेरा दिल भी अपने ड्राइवर पर आ गया था परंतु आश्चर्य इस बात का था कि वह मुझे घास नहीं डालता था और जितना मैं उसके करीब होने की कोशिश करती थी उससे कहीं ज्यादा दूर वह मुझे नजर आने लगता था। उसे पाने में जितनी अड़चनें मुझे आ रही थीं उसे पानी की उतनी ही तीव्र इच्छा मेरी होती जा रही थी।
मुझे ड्राइविंग सिखाने के लिये पिताजी ने अजय को रखा था। वह नौजवान था, खूबसूरत था, खुशमिजाज था लेकिन चापलूस नहीं था। मैंने अपने बचपन से जवानी तक अपने दोस्तों में चापलूसों को ही अधिक पाया था परंतु अजय पर मेरी दौलत, मेरी खूबसूरती और भरपूर जवानी का कोई रौब नहीं पड़ा था और शायद यही कारण था कि मैं उसे पाने को बेताव हो उठी थी।
वह बहुत अच्छा ड्राइवर था और अपनी ड्यूटी के पूरे समय वह सिर्फ ड्राइविंग पर ही ध्यान देता था। मेरी और मेरी खूबसूरती को नजरअंदाज करने का उसका अंदाज ही मेरी कुचेष्टाओं को बढ़ाने लगा मुझे हर चीज आसानी से उपलब्ध हुई थी परंतु अजय मुझसे भाग रहा था और मैं अजय के पीछे भाग रही थी।
``तुम्हारे घर में और कौन-कौन है।´´ एक दिन मैंने उससे उसके व्यक्तिगत जीवन के बारे में जानने के लिये प्रश्न किया।
``अकेला हूं।´´ अजय ने संक्षिप्त सा जवाब दिया और शांत हो गया।
``तुम्हें नहीं लगता,``मैंने उसके जज्बातों को पढ़ने की कोशिश करने की गरज से पूछा, `` कि तुम्हारी जगह कोई और होता तो उसकी निगाह विंड स्क्रीन की जगह कहीं और होती।´´
``तो कहां होती।´´वह मुस्कराता हुआ बोला।
``खुद समझो,`` मैं उससे सटते हुये बोली,``इतने नासमझ लगते तो नहीं हो।´´
``इतना ही नासमझ हूं।´´ वह धूर्तता से मुस्कराते हुये बोला,`` अगर नहीं होता तो ड्राइवर की नौकरी नहीं कर रहा होता।´´
``मैं तुम्हें कैसी लगती हूं।´´ मैंने नया प्रश्न किया।
``जैसी अमीर घराने की लडकियां लग सकती हैं।´´ वह शांत भाव से बोला।
``सीधे नहीं कह सकते कि मैं खूबसूरत लगती हूं।´´
``नहीं कह सकता।´´ वह गंभीरता से बोला,``क्योंकि मैं आपकी खूबसूरती में खो जाऊंगा तो मेरा ध्यान ड्राइविंग पर से हट जायेगा और अगर मेरा ध्यान ड्राइविंग पर से हट गया तो ``आप खूबसूरत हैं´´ कहने की जगह `आप खूबसूरत हुआ करती थीं´ कहना पड़ेगा और मैं ऐसा नहीं चाहता।´´
अजय के पास मेरे हर सवाल का जवाब मौजूद रहता था लेकिन जिस जवाब के इंतजार में मैं रहती थी वह वो देना नहीं चाहता था।
मुझे कुछ और नहीं सूझा तो एक दिन मैंने अपने परिवार वालों के समक्ष यह घोषणा कर दी कि मैं अजय से प्रेम करती हूं और उससे विवाह करना चाहती हूं। सब हतप्रभ रह गये किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसी कोई नादानी कर सकती थी परंतु मैं अपने परिवार वालों की कमजोरी जानती थी और मुझे लगता थाकि अजय तो इस बात को हंस कर मान लेगा। पहले तो मेरे घरवालों ने मुझे समझाने की कोशिश की परंतु मैं नहीं मानी तो मेरे पापा ने एक दिन अजय से इस बारे में चर्चा की लेकिन मेरे ऊपर तब पहाड़ टूट पड़ा जब मैंने सुना कि अजय ने खुद ही मुझसे विवाह करने से इंकार कर दिया था।
तब मैंने अजय को जलाने की खातिर उससे बदला लेने की खातिर एक करोड़पति अधेड़ से विवाह करने का फैसला कर लिया। उसका नाम अश्वनी कुमार था और उसकी कपड़े की मिलें थीं। अक्सर पापा उसके घर आया जाया करते थे और इसी वजह से मैं उसे जानती थी। वो पचास वर्ष का था और उसकी पत्नी कोई पांच वर्ष पहले मर चुकी थी।
मैं जानती थी कि मेरी जिद के आगे कोई नहीं झुकने वाला था इसलिये मैंने सीधे अश्वनी कुमार से ही बात की और चुपके से कोर्ट मैरिज कर ली। अश्वनी कुमार को तो बिना मांगे मोती मिल गया था। वह मुझे पाकर फूला नहीं समा रहा था। विवाह के दो माह बाद ही मैने ड्राइवर के तौर पर अजय को अपने यहां नौकरी की पेशकश की जो उसने कबूल कर ली।
``क्या तुम वाकई नहीं चाहते।´´ एक दिन कार की अगली सीट पर बैठते हुये मैंने अजय को कुरेदा,`कि तुम्हारी मेरे जैसी खूबसूरत पत्नी हो।´´
``क्यों नहीं चाहता।´´मेरी आशा के विपरीत अजय ने जवाब दिया,``मैं तो चाहता था परंतु मैं यह जानता था कि एक ड्राइवर के साथ कोई धनकुबेर अपनी लड़की का विवाह नहीं करता इसलिये मैंने ऐसी कोई कोशिश ही नहीं की थी।´´
शेष अगली कड़ी में......