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ऍहसास ही जिंदगी है...

लेखक : manoj khanna
Summary by : manojkhanna
विजिट्स : 51  शब्द: 600   प्रकाशन तिथि: फरवरी 25, 2008
अगर हम कहे की जिंदगी एहसास है या कहे की एहसास ही जिंदगी है. तो ग़लत नही होगा क्योकि जिंदगी के हर पल मे कोई न कोई एहसास शामिल है जैसे खाने से पहले भूख का एहसास ज़रूरी है, सोने से पहले नींद का एहसास ज़रूरी है,काम कम करने से पहले काम करने कीं इच्छा का एहसास ज़रूरी है,और किसी से बात करने से पहले बात करने की इच्छा का एहसास ज़रूरी है यहाँ तक की अगर हम किसी को अपना दोस्त भी बनाते है तो हमारे अंदर उसके प्रति दोस्ती का एहसास होना बहुत ज़रूरी है.देखा जाए तो ये एहसास ही है जो एक इंसान को दूसरे इंसान से अलग पहचान देते है.अगर एहसास सकारात्मक है तो लिंकन और गाँधी को जन्म देते है लेकिन नकारात्मक रूप धारण कर दाऊद और लादेन भी समाज को दे देते है.हम चाहे तो इस दुनिया मे ही एहससो के द्वारा स्वर्ग और नर्क को भी समझ सकते है .जब हम किसी से प्यार है,किसी की सच्चे दिल से मदद करते है याकिसी को सम्मान देते है तो जो एहसास हमे होते है वो किसी स्वर्ग से कम नही है,वही जब हम किसी को सताते है किसी को कोई तकलीफ़ देते है या कोई पाप करते है,किसी की बद्दुआ लेते है और किसी ग़लत काम की वजह से शर्म महसूस करते है तो समझ लीजिए नर्क इससे भी भयंकर होगा.हर इंसान की जिंदगी मे ये एहसास अलग अलग स्थान रखते है और परिणाम भी वैसा ही लाते है.हर परीक्षा किसी को सफलता और किसी को असफलता का एहसासा होता है अगर सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को सामने रखकर देखें तो पाएँगे की आज समाज के हालत बददतर या बेहतर होना भी बहुत हद तक एहसास पर ही निर्भर करते है.क्योकि एक ग़लत व्यक्ति की पक्ष मे लालच या बहकावे के एहसास मे मतदान करने का एहसास होना, हमारे और समाज के हालत बददतर बना देता है,
और एक सही व्यक्ति के पक्ष मे समझदरीपूर्ण मतदान का एहसास हमारे और समाज के हालत बेहतर सकता है.अगर हम तोड़ा सा भी इतिहास मे ध्यान दे तो पाएँगे हर काल मे घाटी बड़ी और महत्वपूर्ण घटना के पीछे सिर्फ़ एहसास ही है.तो ये सच ही है अगर एहसास नही होते तो शायद रामायण महाभारत और बाइबिल जैसे ग्रंथो की कल्पना करना भी मुश्किल था.ये एहसास ही जिन्होने एक डाकूको संत बनाकर रामायण जैसा ग्रंथ लिखवाया.और इसी एहसास ने शकुनी पैदा कर महाभारत रचवाया और इसी ने भगवान इशू के द्वारा दुनिया को मानवता का पाठ पढ़या दुनिया आज बदली नज़र आती है तो एहसासो के कारण ही अगर आवश्यकता और इच्छा का एहसास ना होता तो आज जिस कंप्यूटर पर हम काम कर रहे है या जिस मोबाइल से बात कर रहे ये भी संभव नही होता और दुनिया को जानना तो दूर हम अपने गाँव शहर और देश के बारे मे भी नही जान पाते ,हमे नही पता होता हवाई जहाज़ क्या होता है ,कंप्यूटर किसे कहते है और मंगल नाम का कोई ग्रह भी है.इसलिए हमे अपने अंदर के एहसास को जगाना होगा सारी सुविधाओ के उपभोग के साथ समझना होगा बूढ़े मा बाप के दुख के एहसास को.अनाथ बच्चो की भूख के एहसास को और जवान बेटी के ग़रीब बाप के एहसास को , समझना होगा किसी की मदद के एहसास को किसी को खुशी के दो पल देने के एहसास को और सबसे बड़कर इंसानियत के एहसास को क्योकि ये ही वो एहसास है जो दे सकता है,हम सब को खुशहाल जिंदगी.
----मनोज खन्ना

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