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प्रकाशन तिथि: जनवरी 13, 2008
हर घंटे 18 महिलाएं क्रूरता की शिकार
Jan 13, 05:39 pm
नई दिल्ली। हर घंटे जिस रफ्तार में घड़ी की सुई टिक-टिक करती हुई आगे बढ़ती है उसी रफ्तार में देश में महिलाओं पर क्रूरता का सिलसिला बढ़ता जाता है। हालिया राष्ट्रीय अपराध सांख्यिकी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर घंटे दो दुष्कर्म, दो अपहरण, चार छेड़खानी और पतियों या संगे-संबंधियों द्वारा सात महिलाओं को मारने-पीटने की घटनाएं घटती हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो <एनसीआरबी> के मुताबिक वर्ष 2006 में औसतन हर घंटे 18 महिलाएं क्रूरता की शिकार हुई और इससे भी परेशान करने वाली बात यह है कि इस तरह की घटनाओं में दिन-प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है।
राज्यों के स्तर पर देखें तो वर्ष 2006 में महिलाओं के प्रति अपराध के मामले में आंध्र प्रदेश सबसे आगे रहा। वहां पर 21,484 मामले सामने आए जो पूरे देश में होने वाले अपराध का 13 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश का नाम आता है जहां पर पूरे राष्ट्रीय अपराध के 9.9 प्रतिशत मामले सामने आए।
हाल ही में राजस्थान के उदयपुर में एक ब्रिटिश पत्रकार के साथ दुष्कर्म और आर्थिक राजधानी मुंबई में नववर्ष की पूर्व संध्या पर दो युवतियों के साथ छेड़छाड़ की घटना ने एक बार फिर इस बारे में कठोर कानून की जरूरत महसूस कराई है।
महिलाओं के प्रति अपराध में हर वर्ष बढ़ोतरी हुई है। एनसीआरबी के अनुसार वर्ष 2003 से 2006 के बीच दुष्कर्म के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दस लाख से अधिक आबादी वाले 35 शहरों में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली शीर्ष पर रहा। दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4134 मामले दर्ज किए गए जो पूरे देश में होने वाले अपराध का 18.9 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर हैदराबाद रहा, जहां 1755 मामले दर्ज हुए।
दिल्ली में होने वाले अपराधों में 31.2 दुष्कर्म के मामले, 34.7 अपहरण, 18.7 दहेज हत्या, 17.1 मामले में पतियों व रिश्तेदारों द्वारा मारने-पीटने और 20.1 प्रतिशत मामले छेड़खानी से जुड़े हुए थे।