' Nameplate' par mahilaaon ke naam..
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प्रकाशन तिथि: जनवरी 03, 2008
हास्य-व्यंग्य 'नेमप्लेट'पर महिलाओं के नाम...
अब समय आ गया है कि महिलाएं जागृत हो जाए और अपनी नेमप्लेट का ऑर्डर बुक कराएं! पुरुषों के लिए भी समय आ गया है कि शादी के बाद ससुराल को अपना नया घर बनाएं! महिलाओं का नाम नेमप्लेट पर क्यों नहीं होता? यह वाकई चर्चा का विषय है....और हम इस पर ही चर्चा करने जा रहे है. इस संबध में दिमाग़ पर ज़ोर देने पर और सोचने पर पता चलता है समाज़ में एक बहुत बड़े बदलाव की आवश्यकता की ज़रुरत आन पड़ी है.
अब देखिएं...परिवार का होना एक आम बात है. माता-पिता,बच्चें,बहुएं,पोते-पोतियां वगैरे साथ मिलकर एक परिवार बनता है. अब माता-पिता अलग़ घर में रह रहे है और उनके बच्चे अलग़ घर में रह रहे है...तो घर दो हो जाते है और हर घर के बाहर एक नेमप्लेट लगाई जानी चाहिए...यह कायदा है. तो ऐसे में एक ही परिवार की दो नेमप्लेटें अपनेआप ही हो जाती है. इस प्रकारसे एक ही परिवार, कई घरों में रहने चला जाता है तो नेमप्लेटों की संख्या में भी आगे,आगे वृद्धी होती चली जाती है.
अब एक परिवार का; या यूं कहिए कि एक घर का मुखिया तो एक ही हो सकता है. राशन-कार्ड में भी परिवार के सदस्य कई होते है, पर मुखिया तो जी एक ही होता है न?...अगर समाज़ में महिलाओं को अपना नाम नेमप्लेट पर चाहिए तो मुखिया की भूमिका अदा करनी पड़ेगी; परिवार का मुखिया बनना पड़ेगा! मान लो,अगर महिला मुखिया भी बन जाती है तो यहां फिर विवाद खड़ा हो जाता है कि वह अपने नाम के साथ अपने पिता का सरनेम जोड़ना चाहेगी या पति का?
...ऐसे में दूसरे विवाद के बाद फिर तीसरा विवाद खड़ा हो सकता है कि बच्चों के नाम के साथ पिता का नाम क्यों जोड़ा जाए?...माता का क्यों नहीं? फिर पुरुष झगड़ा करेंगे कि हमारा नाम नेमप्लेट पर क्यों नहीं लिखा जाए?...इस समस्या का एक ही हल हो सकता है कि, समाज में बहुत बड़ा बदलाव आ जाए और शादी के बाद महिलाओं की जगह पुरुष ससुराल में जा कर रहना शुरु कर दें; तो यकीनन किसी पुरुष का नाम नेमप्लेट की शोभा नहीं बढ़ा सकता! महिला के नाम की ही नेमप्लेट बन सकती है.
..और पुरुष को शांति से घर में रहना है तो अपने नाम की नेमप्लेट के लिए जिद न करें और पत्नी के नाम की नेमप्लेट को दरवाज़े के बाहर खड़ा...चाहे जितनी बार पढ़े!