फिल्मी हास्य-व्यंग्य
...और
शाहरुख हो गए नौ,दो,ग्यारह्!
कल के भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच की हम बात कर रहे है...तो जनाब हम मैच देखने चले गए.हमारे साथ वाली कुर्सी पर एक बुरखे वाली
मोहतरमा बैठी हुई थी.बीच बीच में वह तालियां बजाएं जा रही थी.लाख कोशिशों के बावजूद भी हमारी ताली उस मोहतरमा जितनी जोर से नहीं बज रही थी,सो हमें यह बात बड़ी पिंच कर रही थी.
..और पाकिस्तान का एक प्लेयर जब बॉल की तरह एकदम से लुढकने लगा..आखा स्टेडियम हंसी के फंवारों से भीग गया. हमारे साथ वाली मोहतरमा ‘हं..हं..हं.....क..क..क..क..क..'' करती हुई हंस रही थी. हम देर से सही, पर अब उसकी असलियत समझ गए.फटाक से डायरी और पेन निकाल कर मोहतरमा के सामने धरा! मोहतरमा ने हमसे ज्यादा फटाक..दिखाते हुए ऑटोग्राफ कर दिया ''शाहरुख खान''!
" तेरी भी चुप और मेरी भी चुप...शाहरुख भाई, अब बिलकुल भी मत हंसना,हां!" हमने हिदायत दे डाली.मैच चल रहा था.मोहतरमा अब तो तालिया भी नहीं बजा रही थी.
...और उधर धोनी के हाथ से एक कैच छूटते ही मोहतरमा चिल्लाई.." इ..इ..इ..इतना आसान कैच, ध..ध..ध धोनी ने.." और वहां बैठे दर्शक मैच देखना छोड़ कर मोहतरमा की तरफ लपके! मोहतरमा ने बुरखा हमारे उपर डाला और बोली " संभाल लेना..."
अब जैसे हमने बुरखा उतार दिया,हमें घेरे हुए दर्शक बोल पड़े" सॉरी, हम समझे थे कि क्रिकेट बोर्ड के बैन लगाने के बावजूद भी ''खान''यहां आ धमके है, मगर ये तो आप है मैडम!...वेरी सॉरी.." ………..हमें शाहरुख खान अब कहीं नज़र नहीं आएं..वह तो नौ,दो,ग्यारह...हो गए थे!