Unt hi to hai..kisee karavat to baithhegaa hi!
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प्रकाशन तिथि: नवम्बर 15, 2007
व्यंग्य
ऊंट ही तो है..किसी करवट तो बैठेगा ही!
दो लड़के मैदान में आए. एक का नाम '' सांवरिया'' और दूसरे का नाम ''ओम शांति ओम''... दोनों रेस लगाने के लिए तैयार है...पर क्या किया जाए? दोनों की जिद है कि वे एक साथ ही चलेंगे.एक साथ चलते है तो एक साथ ही मंझिल पर पहुचेंगे! फिर हार जीत को कैसे नापा जाएगा? और फिर रेस क्या हुई? देखने वाले दर्शकों का क्या हाल होगा? उन्हें चट्खारे भी तो मिलने चाहिए! ये क्या बात हुई?
यह सब विचार करते हुए तय हुआ कि दोनों लड़कों को ऊंट पर बैठा कर चलाया जाए....लेकिन लड़कों में फिर बहस हुई कि ऊंट पर आगे कौन बैठेगा और पीछे कौन? फिर विचार करते हुए रास्ता निकाला गया कि ऊंट की दोनों तरफ...सामान रखने की जगह इन दोंनों को बैठाया जाए...फिर क्या बैठाया गया और ऊंट चल पड़ा मंझिल की ओर!
ऊंट के साथ साथ ही दर्शक पीछे पीछे चल रहे थे... ''सांवरिया'' और ''ओम शांति ओम'' हाथ हिला हिला कर दर्शकों को रेस देखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे.समझदार दर्शक समझ चुके थे कि ऊंट आगे चल कर किसी एक ही करवट पर बैठेगा! फिर उस करवट वाले लड़के का तो भगवान ही मालिक है!
...और वह स्थान आ गया! ऊंट बैठने ही वाला था; दर्शकों की नज़र ऊंट पर टीकी हुई थी!....और ऊंट बैठ गया. उस करवट बैठा,जहां ''सांवरिया''बैठा हुआ था.''सांवरियां''औंधे मुंह ज़मीन पर गिर गया...इस में ऊंट की क्या ग़लती? किसी करवट तो उसने बैठना ही था!
... उधर''ओम शांति ओम'' अपनी जीत के डंके बजाने में मस्त हो गया..अरे! कम से कम उस ऊंट को थैंक्स ही बोल देता!