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प्रौद्योगिकी और इसका प्रभाव

Summary rating: 4 stars 3 समीक्षा
Summary by : garima g
विजिट्स: 982
शब्द: 900
प्रकाशन तिथि: मार्च 27, 2006
प्रौद्योगिकी और दैनिक जीवन पर इसका प्रभाव
बात केवल कुछ दशकों की है किंतु ऐसा लगता है कि एक युग परिवर्तित हो गया हो. इस थोड़े से समयकाल में विश्‍व के परिदृश्‍य में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है. जरा बताइए कि हम लोगों में से कितने लोग आज पोस्‍टकार्ड या अंतर्देशीय पत्रों को प्रयोग करते हैं. भले ही हम पिछले लगभग 150 वर्षो से डाक सेवा का प्रयोग कर रहे हों किंतु जब हमारे पास वार्तालाप करने के लिए या अपने संदेश भेजने के लिए फोन, मोबाइल और इंटरनेट उपलब्‍ध हैं तो फिर इस पंरपरागत डाक सेवा की किसे आवश्‍यकता है. साथ ही हमारे पास एक व्‍याप्‍त कोरियर नेटवर्क उपलब्‍ध है. वे दिन चले गए जब सुदूर निवास करने वाले अपने संबंधियों द्वारा भेजे जाने वाले पत्रों की हमें प्रतीक्षा रहती थी और उनके पत्र प्राइज़ करते ही हमारे दिल की धड़कन तेज हो जाती थी. आज सभी बड़े-छोटे शहरों की सड़कों पर दृष्टि डालिए. जो लोग पहले साइकिल सवार होते थे, आज वे स्‍कूटर या मोटर साइकिल चलाते हैं और स्‍कूटर चलाने वाले लोग आज कारों में यात्रा करते हैं. जिन लोगों के लिए हवाई यात्रा कभी एक स्‍वप्‍न हुआ करती थी, आज वे सपरिवार हवाई यात्रा करते हैं और इसका श्रेय उड्डयन क्षेत्र में निजी कंपनियो के प्रवेश को जाता है. उल्‍लेखनीय है कि इस क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्‍पर्धा के चलते हवाई यात्रा शुल्‍क इतना कम हो गया है कि रेल का प्र‍थम श्रेणी का किराया भी उससे मंहगा है. कंपनियों व बैंकों को आकर्षक लोन सुविधाओं के कारण आम लोगों के लिए दोपहिया और चौपहिया वाहन खरीदना बहुत सहज हो गया है. आज शहर में प्रत्‍येक दूसरे व्‍यक्ति के पास मोबाइल है और आप अपने कक्ष में बैठकर इंटरनेट के माध्‍यम से आबू धाबी (अमिरात) या न्‍यूजर्सी (अमेरिका) स्थित अपने परिजनों से वार्तालाप कर सकते हैं. एक पिछड़े हुए गांव में कंप्‍यूटरों की स्‍थापना होते ही एक निरक्षर मां सऊदी अरब में कार्य कर रहे अपने पुत्र से बात कर सकती है. अपने बच्‍चे के जन्‍म लेने से पहले ही आप यह जान सकते हैं कि वह लड़का है या लड़की. घर बैठे ही अपने मोबाइल या इंटरनेट के माध्‍यम से आप रेल या हवाई टिकट बुक करा सकते हैं. पृथ्‍वी पर जिस स्‍वर्ग की कल्‍पना आपने की होगी, क्‍या वो इससे बेहतर हो सकता है ?
किंतु साथ ही साथ आपका यह अच्‍छा स्‍वप्‍न कुछ नकारात्‍मक कारणों से दुस्‍वप्‍न भी बन सकता है. कल्‍पना कीजिए कि यदि यही प्रौद्योगिकी कुछ लोभी, स्‍वार्थी और दुर्जन लोगों के हाथ लग जाए तो प्रौद्योगिकी का यह वरदान हमारे लिए श्राप बन सकता है. जुलाई 2005 में केंद्रीय जांच ब्‍यूरो (CBI) के पास साइबर अपराध का एक आश्‍चर्यजनक मामला आया जब एक हैकर ने गॉजियाबाद के एक ऑनलाइन व्‍यापारी का पासवर्ड चुरा लिया और उसके नाम पर शेयरों की खरीद की जिसके परिणामस्‍वरूप व्‍यापारी को पांच लाख रूपए का घाटा हुआ. इस प्रकार के कुछ मामले मुंबई (महाराष्‍ट्र) और उज्‍जैन (मध्‍य प्रदेश) में भी प्रकाश में आए जहां हानि करोड़ों रूपए में थी. कुछ वर्ष पहले तिरूवंनतपुरम (केरल) में एक कंप्‍यूटर विशेषज्ञ को गिरफ्तार किया गया जिसने एक बहुराष्‍ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी की महिला कर्मचारी की कुछ अश्‍लील एवं आपत्तिजनक तस्‍वीरें इंटरनेट में भेज दीं. मोबाइल फोन अश्‍लीलता के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. जुलाई 2005 में मुंबई में बॉलीवुड अभिनेत्री मल्लिका शहरावत जैसी दिखने वाली एक युवती और विदेशी व्‍यक्ति की एक छह मिनट की वीडियो सैक्‍स क्लिक एम.एम.एस के माध्‍यम से विभिन्‍न मोबाइल उपभोक्‍ताओं तक प्रसारित हो गई. अधिवक्‍ताओं का मानना है कि मौजूदा कानून (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000) इलैक्‍ट्रॉनिक्‍स अपराधों से निपटने में पूरी तरह से असफल रहा है. राज्‍य अपराध रिकार्ड ब्‍यूरो के एक तंत्र विश्‍लेषक (System Analysist) के अनुसार देश में प्रति एक मिनट में पांच मोबाइल फोन बिकते हैं. अकेले एक महीने में लगभग 20 लाख मोबाइल फोन बिकते हैं. यह बात कौन नहीं जानता है कि इंटरनेट अश्‍लीलता प्रमुख अकादमिक संस्‍थानों के कॉरिडोरों में सर्वर अभिरूचि मानी जाती है.
वर्ष 2003 में देश में साइबर अपराध के 70 मामले दर्ज किए गए थे: इनमें इंटरनेट या मोबाइल के माध्‍यम से अश्‍लील चित्र प्रसारित करना, मादक पदार्थ (‘हनी’ के नाम से विपणित) एवं अन्‍य उपभोक्‍ता वस्‍तुएं बेचना, जालसाजी, गबन, धोखाधड़ी, स्‍पैमिंग और स्‍टैग्‍नोग्राफी (एक तकनीक जिसमें चित्रों के पीछे ‘एन्‍क्राइप्टिड संदेश’ भेजे जा सकते हैं) आदि के साथ-साथ ऐसे मामले भी शामिल हैं जहां बल्‍क में भेजी गई ई-मेल के माध्‍यम से पूरे कंप्‍यूटर सूचना तंत्र को नष्‍ट करने का प्रयास किया गया. 11 सितंबर,2001 को अमेरिका में वर्ल्‍ड सेंटर पर आतंकवादी हमले के दौरान आतंकवादियों ने इसी स्‍टैग्‍नोग्राफी के माध्‍यम से अपने सा‍थियों को सूचना भेजी थी.
प्रौद्योगिकी के दुरूपयोग के लिए प्रौद्योगिकी को दोष नहीं दिया जा सकता है. व्‍यक्ति के भीतर का राक्षस जब उस पर हावी होने लगता है तो उसकी नैतिकता, मर्यादा आदि सब दम तोड़ने लगती है. यदि हम अपने नैतिक मूल्‍यों, परंपराओं और संस्‍कृति को सम्‍मान देते हैं तो फिर प्रौद्योगिकी का इस प्रकार से दुरूपयोग करने की बात नहीं सोच सकते हैं. प्रौद्योगिकी का यदि सदुपयोग किया जाए तो हमारे जीवन की गुणवत्ता में एक अभूतपूर्व सुधार ला सकती है. आज मोबाइल फोन को एक म्‍यूजिक सिस्‍टम, ए‍क टेलीफोन और यहां तक कि एक क्रेडिट कार्ड के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है. किंतु फिर भी कुछ लोग इसका दुरूपयोग करते हुए सभी प्रौद्योगिकीय अविष्‍कारों पर एक अमिट कलंक लगा देते हैं.
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