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क्‍या अश्‍लीलता की सभी हदें पार कर जाएगा साइबर युग ?

Summary rating: 4 stars 17 समीक्षा
Summary by : garima g
विजिट्स : 760  शब्द: 900   प्रकाशन तिथि: मार्च 03, 2006
क्‍या अश्‍लीलता की सभी हदें पार कर जाएगा साइबर युग ?
आज के कंप्‍यूटर युग में भले ही हमें अनगिनत तकनीकों के माध्‍यम से जीवन को सुविधाजनक और गतिशील बनाने में प्रेरणा मिली हो मगर एक सच यह भी है कि इसी कंप्‍यूटर युग में ऐसे-ऐसे अपराध हो रहे हैं,जिनकी कुछ वर्ष पहले तक कल्‍पना करना भी मुश्किल था।

यदि साइबर अपराधों के जोर ने पुलिस प्रशासन को झकझोर के रख दिया है तो आज सामाजिक परिवेश में गंदी सोच का जहर धोल रही अश्‍लील वेबसाइटें भी कोई कम चिंता का विषय नहीं हैं।

ऐसी ही कुछ बाल अश्‍लीलता (चाइल्‍ड पार्नाग्राफी ) से संबंधित वेबसाइटें न सिर्फ समाज में अश्‍लीलता फैला रही हैं बल्कि इसने कई देशों के पारिवारिक बच्‍चों में एक अजीब किस्‍म की खौफ उत्‍पन्‍न कर दिया हैं।
सच्‍चाई यह है कि आज विश्‍व के कई देशों में बाल अश्‍लीलता संबंधी वेबसाइटें बनाने वाले बाले यौन शोषक, जिन्‍हें पेडियोफिल कहा जाता है द्वारा ऐसी तस्‍वीरें तैयार करने के लिए हजारों बच्‍चे शोषण का शिकार बनाए जा रहे हैं। ये अश्‍लील तस्‍वीरें कई तरह की होती हैं, जैसे कि नग्रावस्‍था में स्‍नान कर रहे 7 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्‍चे या फिर उत्तेजक अवस्‍थाओं में लेटे हुए किशोर, इन वेबसाइटों के जरिए दिखाई जाने वाली अधिकांश तस्‍वीरों को स्‍कैन करके कंप्‍यूटर में डाला गया हैं। ज्‍यादातर बाल यौन शोषक इसे केवल व्‍यावसायिक उद्देश्‍य के लिए इस्‍तेमाल करते हैं और इसे तैयार करने के लिए क्रूरता की सभी हदें पार कर जाते हैं। मसलन वे इंटरनेट के माध्‍यम से 13 वर्ष तक के बच्‍चों से दोस्‍ती करते हैं, फिर धीरे-धीरे उनके निजी जीवन से संबंधित जानकारियां हासिल करते हैं, उनसे मिलना-जुलना शुरू करते हैं और फिर न सिर्फ धोखे से उनकी उत्तेजक तस्‍वीरें खींचते हैं बल्कि उन्‍हें अपनी काम-वासना का शिकार बनाते हैं।
अमरीका में चाइल्‍ड सैक्‍स , फोटो व फिल्‍म्‍स के आयात के खिलाफ संधर्षरत कस्‍टम्‍स साइबर स्‍मगलिंग सैंटर चलाने वाले केविन डैली बताते हैं कि 1980 तक चाइल्‍ड पार्नाग्राफी का यह मामला पूरी तरह से नियंत्रण में आ चुका था मगर अब इंटरनेट के प्रादुर्भाव से य‍ह फिर से प्रस्‍फुटित होकर सामने आया हैं और इस बार काफी गंभीर रूप में सामने आया हैं।
इंटरनेट के माध्‍यम से बाल यौन शोषकों को अब इस क्षेत्र में काफी अधिक संभावनाएं दिखाई देने लगी हैं। अब ये लोग तस्‍वीरों को कॉपी कर अपने कंप्‍यूटर में इन्‍हें फाइल कर लेते हैं और फिर दुनियाभर में स्थित गंदी सोच रखने वाले अपने दोस्‍तों को यह तस्‍वीरें भेज देते हैं। यही नहीं, ये लोग अपने आप को एक बालक के रूप में प्रस्‍तुत कर इंटरनेट के चाइल्‍ड चैट रूम में प्रवेश कर जाते हैं और बाल यौन शोषण के लिए तरह- तरह के हथकंडे अपनाते हैं।
आज बाल यौन शोषकों ने दुनिया भर में अपना जाल फैला रखा हैं, जिन्‍हें एक दम से तोड़ना आसान नहीं हैं।
1999 में यू. एस. कस्‍टम एजैंट्स द्वारा बाल अश्‍लीलता वेबसाइट के मामले में जांच से यह ज्ञात हुआ कि ताजिक एक्‍सप्रैस नाम की यह वेबसाइट का उद्गम स्‍थान तजाकिस्‍तान था, जिसमें पहले महीने में कुल 95,450 नग्र तस्‍वीरें डाउनलोड हुई पड़ी थी। चाइल्‍ड पार्नाग्राफी को लेकर अमरीका और अधिकतर यूरोपीय देशों के प्रशासक इसलिए भी चिंतित हैं क्‍योंकि यह न सिर्फ इंटरनेट के जरिए आसानी से उपलब्‍ध हो पाने के कारण दुनिया भर में तेजी से फैल रहा हैं बल्कि बाल यौन शोषकों को इस तरह के दुष्‍कर्म करने के लिए प्रेरित कर रहा साथ हुए यौन शोषण को सार्वजनिक किया और वे अपने ऑन लाइन यौन उत्‍पीड़क को कोर्ट में धसीट ले आई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अमरीका प्रशासन ने इसके खिलाफ कुछ सख्‍त कदम उठाए और अमरीका के एक नए कानून के अनुसार इलैक्‍ट्रानिक कम्‍यूनिकेशन और कंप्‍यूटिग सर्विसिग को चाइल्‍ड पार्नाग्राफी कानून की अवहेलना (यदि की जाती है ) के मामले में रिपोर्ट देनी होगी जो न किए जाने पर उस पर 100हैं।
गत वर्ष अमरीका द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार 10 से 17 के आयु वर्ग के प्रत्‍येक 13 बच्‍चों में से एक बच्‍चा किसी न किसी प्रकार से यौन उत्‍पीड़न का शिकार हुआ हैं। अर्थात ऐसे बच्‍चों को या तो फोन या फिर इंटरनेट के माध्‍यम से दोस्‍त बनाया गया फिर उपहारों या अन्‍य कोई प्रलोभन देकर इन्‍हें यौन शोषकों ने अपने जाल में फंसा लिया। बहरहाल बाल यौन शोषण से संबंधित इस अपराध ने जहां अमरीका और यूरोपीय देशों के प्रशासनिक लोगों की नींदे हराम की हुई हैं। वहीं भारत में इस विषय को गंभीर मानने की जरूरत समझी नहीं जा रही। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार ‘हमारा समाज, हमारी संस्‍कृति हमें यह इजाजत नहीं देती कि हम ऐसे मुद्दों को ऊपर उठाएं। पुलिस अधिकारी चाहे जो भी दलीलें देते रहें मगर वे हाल ही में एक 16 वर्षीय बालक द्वारा अश्‍लील वेबसाइट तैयार किए जाने और डी पी एस स्‍कूल के एक किशोर द्वारा मोबाइल के माध्‍यम से अश्‍लील फिल्‍म बनाने के मामले की अनदेखी नहीं कर सकते। भारत में भले ही पश्चिमी देशों की तरह बाल यौन उत्‍पीड़न के मामले प्रकाश में न आए हों मगर देश में बच्‍चों की कुदरती मासूमियत नष्‍ट हो रही है और इन अश्‍लील वेबसाइट के माध्‍यम से गंदे विचार उनके दिमाग में धर कर रहे हैं, और उत्तेजना उनकी सांसो में फैल रही है और इस भयानक सच्‍चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।

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