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श्वूंग होम>How To>Careers >नए जॉब्स ज्यादा पैसा!

नए जॉब्स ज्यादा पैसा!

द्वारा: pratima avasthi    
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नए जॉब्स ज्यादा पैसा!

पिछले हफ्ते जारी हुए मर्सर के सर्वेक्षण को भारत के विशेष संदर्भ में देखा जाए तो यह उम्मीद जगती है कि इंडिया इंक की सैलेरी में 12.7 प्रतिशत की औसत बढ़ोतरी हो सकती है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में सैलेरी का यह तोहफा औसतन 14 फीसदी बढ़ सकता है, वहीं इसके बाद आईटी और टेलीकॉम सेक्टर में इसके 11.8 प्रतिशत उछाल लेने का अनुमान है।

सर्वेक्षण के अनुसार वेतन बढ़ोतरी हर क्षेत्र में होने का अनुमान है लेकिन फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर इसका अपवाद भी हैं, जहां 2011 में 12.8 प्रतिशत औसतन सैलेरी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है जबकि पिछले साल यह अनुमान 13 प्रतिशत का लगाया गया था।

दूसरे सेक्टर जैसे कैमिकल में 13.4 वेतन-वृद्धि का अनुमान लगाया गया है जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, फाइनेंस सर्विस, इंश्योरेंस और मैन्युफैक्चरिंग के भी क्रमश: 13.8, 12.6 और 13.4 प्रतिशत औसत बढ़त के आसार हैं।

हालांकि नए जॉब्स ज्यादा पैसा!
के ये ताजा आंकड़े 2006-07 की गणना को छू भी नहीं पाए हैं, जब हर क्षेत्र में औसतन वेतन-वृद्धि 15 फीसदी तक पाई गई थी। लेकिन अनुमान यह लगाया जा रहा है कि अगर औसत वेतन-वृद्धि की यह दर जारी रहती है तो हो सकता है कि 2006-07 का दौर लौट आए।
मर्सर इंडिया की मार्केट बिजनेस लीडर (इंफॉर्मेशन प्रोडक्ट सर्विस) शमिता चटर्जी कहती हैं, "अगर यह रूझान जारी रहा तो हम 2006-07 के दौर की याद को फिर से दोहरा सकते हैं।" सर्वेक्षण के नतीजोे से यह जाहिर होता है कि 2010 में सैलेरी की वास्तविक बढ़त 11.8 प्रतिशत हुई थी, जब कंपनियों ने अपनी रणनीतियां तय की थीं।

इस बार 42 फीसदी कंपनियों ने मुद्रा-स्फीति से लड़ने के उपायों को पहले से ही लागू कर दिया है।
चटर्जी के अनुसार "यात्रा और ईधन-भत्ते के तहत मुद्रास्फीती के लिहाज से आय में कमी के चलते 38 प्रतिशत कंपनियों ने सैलेरी में 5 प्रतिशत बढ़ोतरी का उपाय शामिल किया है। जबकि 1 प्रतिशत कंपनियों का कहना है कि वे मुद्रास्फीति के खाते में दो-तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी करने को तैयार हैं।"

हालांकि इस दौर में कई कंपनियां यात्रा-भत्ता कम करके कर्मचारियों को घर से काम करने की छूट दे रही हैं। 67 प्रतिशत कंपनियां फ्रेशर्स को मौका देने को तैयार हैं। इंडिया मॉनिटर के अनुसार ज्यादातर नए जॉब्स सेल्स, मार्केटिंग, टेक्निकल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में सृजित होंगे। वहीं एक-तिहाई कंपनियों ने कहा कि वे एचआर, फाइनेंस, एकाउंटिंग जैसे क्षेत्रों में ज्यादा मौके देंगी।
प्रकाशन तिथि: 15 जुलाई, 2011   
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