भारत में भूभौतिकीय शिक्षा
भारत में 1949 से भूभौतिकी का अध्ययन कराने वाले प्रमुख संस्थान हैं आंध्र विश्वविद्यालय वाल्टेयर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी आईआईटी खड़गपुर इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स धनबाद रुड़की विश्वविद्यालय तथा उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद। भारत में भूभौतिकी शिक्षा का अध्ययन एक साथ 1949 में आंध्र विश्वविद्यालय (एयू तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू में शुरू किया गया था। आंध्र विश्वविद्यालय ने बीएससी स्तर के पाठ्यक्रम की शुरुआत की और बाद में निम्नलिखित विषय क्षेत्रों में एमएससी डिग्री भी आरंभ की गई - कमौसमविज्ञान और समुद्र विज्ञान खपृथ्वी के आंतरिक भागों की भौतिकी आरंभ में ये पाठ्यक्रम 2 वर्ष की अवधि के थे जिन्हें बाद में 1955 में बढ़ाकर 3 वर्ष का कर दिया गया। 1949-52 की अवधि के दौरान
विभाग के प्रथम अध्यक्ष प्रो. एन.के.सेन थे। 1978 में आंध्र विश्वविद्यालय ने समुद्री भूभौतिकी में दो वर्षीय एमएससी पाठ्यक्रम शुरू किया। बीएचयू में 1949 में जब प्रोफेसर राजनाथ
विभागाध्यक्ष थे भूभौतिकी का अध्ययन भूविज्ञान के रूप में शुरु किया गया। बाद में (1964 भूभौतिकी को अलग कर दिया गया और प्रोफेसर एचएस राठौड़ प्रथम विभागाध्यक्ष
बने। वर्तमान में समन्वेषण भूभौतिकी (3 वर्षीय एमएससी पाठ्यक्रम तथा मौसम विज्ञान का अध्ययन कराया जा रहा है। 1951 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी खड़गपुर में भूविज्ञान और भूभौतिकी विभागों की स्थापना की गई। आरंभ में इस विभाग ने भूविज्ञान और भूभौतिकी में 3 वर्षीय एकीकृत पाठ्यक्रम शुरु किए। 1957 में एक वर्ष की अवधि के
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम (डीआईआई टी तथा भूभौतिकी में एमएससी पाठ्यक्रम शुरु किया गया। यह अब भी जारी है। रुड़की विश्वविद्यालय में प्रो आरएसमित्तल के नेतृत्व में 1969 में भूविज्ञान के एक विभाग के रूप में भूभौतिकी में तीन वर्ष का एमटैक पाठ्यक्रम शुरु किया गया। उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद में भूभौतिकी की पढ़ाई 1965 में शुरु की गई। जब वर्ष का एमटैक पाठ्यक्रम आरंभ किया गया। भारत-सोवियत द्विपक्षीय समझौते (1966 के तहत उस्मानिया में भूभौतिकी विभाग को सोवियत संघ से अच्छी तकनीकी और मानवशक्ति सहायता प्राप्त हुई 1969 में समन्वेषण भूभौतिकी केंद्र की स्थापना की गई। वर्तमान में भूभौतिकी के सभी विभागों में संख्यात्मक विश्लेषण संचार सिद्धांत संभाव्यता की इलैक्ट्रिकल और इलैक्ट्रोमेग्नेटिक पद्धतियां सिग्नल प्रोसेसिंग कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग वैल-लॉगिंग भूकम्पत्व गुरुत्वाकर्षण और संभाव्यता की चुम्बकत्व पद्धतियां खनन भूभौतिकी और पेट्रोलियम समन्वेषण जैसे पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कराई जाती है। इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स धनबाद एमटैक डिग्री के समकक्ष पेट्रोलियम समन्वेषण में विशेषीकृत पाठ्यक्रम संचालित कर रहा है। कुछेक विभाग विभिन्न विषयों जैसे कि मौसम विज्ञान समुद्री भूभौतिकी भूकम्पविज्ञान तथा पृथ्वी के अंदरूनी भागों जिऑइलैक्ट्रिसिटी जिऑमैग्नेटिज्+म दूर संवेदी पर्यावरणीय भूभौतिकी उन्नत हाइड्रोलॉजी आदि में विशेषीकृत पाठ्यक्रम (विकल्प के रूप में) संचालित करते हैं। भूभौतिकी के सभी विभागों में कुशल स्टाफ प्रयोगशालाएं तथा कम्प्यूटर की सुविधाएं हैं।
भूभौतिकी में कैरियर भूभौतिकीविद क्षेत्र अन्वेषण; प्रयोगशाला अध्ययनों तथा प्रयोगों; भूतल के नीचे रखे गए उपकरणों से डॉटा संग्रहण तथा भूतल से हजारों किलोमीटर दूर स्थित उपग्रहों से डॉटा संग्रहण; दूनिया के सर्वाधिक पोटेंट सुपर कम्प्यूटरों का प्रयोग करते हुए डॉटा प्रोसेसिंग और विश्लेषण; तथा हजारों मीटर गहरे कुएं खोदना।
भूभौतिकविदों के लिए रोजगार के अवसरों की काफी अच्छी संभावनाएं है, विशेषकर ऐसे में जब समन्वेषण भूभौतिकी डिग्रियों में अध्ययन के विविध क्षेत्रों तथा व्यावहारिक क्षेत्र अध्ययन शामिल किया गया है। कोयला, पेट्रोलियम, खनिज और पानी की खोज तथा खतरनाक कचड़े के निपटान जैसे कुछेक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र हैं जिनमें आने वाले कई वर्षों में प्रशिक्षित भूभौतिकीविदों के कौशल की आवश्यकता होगी।
उद्योग तेल और गैस उद्योग सामान्यतः भूभौतिकीविदों का और विशेष रूप से भूकम्पविज्ञानियों का एक बड़ा नियोक्ता रहा है। इस क्षेत्र में रोजगार बाजार रुख नरम-गरम होता रहता है लेकिन इसमें उच्च वेतन की क्षमता है। नियोक्ता मास्टर डिग्री वाले छात्रों का ेप्राथमिकता देते हैं, लेकिन केवल स्नातक योग्यता धारकों को भी वे रख सकते हैं तथा तब वे छात्र की आगे की पढ़ाई में सहायता करते हैं। पर्यावरणीय परामर्शी कम्पनियां भूभौतिकीविदों को उनकी मात्रात्मक पृष्ठभूमि के कारण हायर करती है। उदाहरण के लिए यह दूषित जल के उप भूतल मॉडलिंग में लाभदायक हो सकता है। विभिन्न निजी परामर्शी कम्पनियां भी भूकम्पविज्ञान के क्षेत्र में कार्य कर रही है तथा भूकम्प से होने वाले खतरों का अनुमान लगाती हैं। ये कम्पनियां भूकम्पविज्ञान में उन्नत डिग्रीधारी छात्रों के लिए समान आउटलेट्स हो सकती
शिक्षण जो व्यक्ति हाई स्कूल का गणित या विज्ञान का शिक्षक बनने के इच्छुक हैं उनके लिए भूभौतिकी डिग्री बहुत अच्छा विकल्प है। इससे ऍप्लाइड गणित, इलैक्ट्रिसिटी और
मैग्नेटिज्+म, हीट फ्लो तथा इलास्टिसिटी के क्षेत्र में मजबूत पृष्ठभूमि तैयार होती है तथा यह ज्वालामुखी, भूकम्प, प्लेट टेक्टोनिक्स तथा सौर प्रणाली के बारे में विशेषज्ञ जानकारी प्रदान करता है। जो व्यक्ति कॉलेज स्तर पर शिक्षण के इच्छुक हैं उनके लिए भूभौतिकी में पीएचडी अपेक्षित है; लेकिन उन छात्रों के लिए एसएलयू परास्नातक कार्यक्रम विशेष रूप से तैयार किया गया है जो भूभौतिकी में उन्नत डिग्री के लिए अध्ययन करना चाहते हैं। स्नातक विद्यालय के लिए आवेदन और चयन के लिए मार्ग-निर्देशन सामान्यतः संकाय द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। भूभौतिकी में स्नातक विद्यालय सामान्यतः मुफ्त होते हैं; संस्थान सामान्यतः ट्युशन फीस माफ कर देते हैं तथा छात्रों को अध्ययन के दौरान 15-20 हजार रुवार्षिक स्टाइपेंड भी देते हैं। यह नोट करना महत्वपूर्ण है कि एक उन्नत भूभौतिकी डिग्री कई गैर-अकादमिक रोजगार मार्गों के लिए
भी लाभदायक है।