डॉ रमेश प्रसाद मिश्र द्वारा लिखित "
जीवश्म विज्ञान"
मध्य प्रदेश हिन्दी ग्रन्थ अकादमी से प्रकशित है। स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम के अनुसार यह किताब लिखी गई है पुस्तक कि भाषा सरल व सुबोध है। पुरातन काल में पाये जाने वाले प्राणीयों और वनस्पतियों को
जीवाश्म कहते है। जीवाश्म अध्ययन भू-विज्ञान में अत्यधिक महत्तवपुर्ण है, जिसके कारण हमें भू-विज्ञानिक कालानुक्रम, स्तरण सहसम्बन्ध, पुरा भूगोल, पुराजलवायु तथा पुरा प्राणी व वनस्पति समुह प्रवासों जैसै महत्व्पुर्ण विषयों कि जानकारी होती है। पुस्तक के लेखन मे आकृतिक वर्णन के साथ उपरोक्त अंगो का भी लेखक ने ध्यान रखा है।
प्राणियों को अपृष्ठवंशी व पृष्ठवंशी समूहों में बांटा गया है संघ, वर्ग,जाति व व्यक्ति कि संख्या कि दॄष्टि से अपृ्ष्ठवंशी प्राणीयों का महत्तव पृ्ष्ठवंशी प्राणीयों कि तुलना मे भू-वैज्ञानिक काल तथा वर्तमान में भी अधिक है। इसी कारण स्नातक स्तर पर अपृष्ठवंशी जीवाश्म विज्ञान का अध्ययन महत्वपुर्ण समझा जाता है। पुस्तक में कुल ८ अध्याय है। जीवाश्म विज्ञान के सामान्य महत्वके साथ साथ अपृष्ठ्वंशी जीवश्मों के प्रमुख संघों का विस्तृत वर्णन किया गया है। इन सभी दॄष्टि्यों से यह पुस्तक छात्रों व अध्यापकों के लिए उपयोगी है.
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