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नागालैंड में... 'गौर' को राजकीय पशु का दर्जा!
नागालैंड में... 'गौर' को राजकीय पशु का दर्जा!
नागालैंड एक सुंदर प्रदेश है... यहां गौर को राजकीय पशु का दर्जा
प्राप्त है!... आइए अब गौर के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करें, जो शिक्षाप्रद भी है और मनोरंजक भी है!
गौर एक विशालकाय प्राणी है!...इसका नाम तो सुनने में आया ही होगा!...यह एक वन्य जीव है! इसे 'इंडियन बायसन' भी कहा जाता है!....यह लगभग जंगली भैसे जैसा दिखता है, लेकिन उससे अलग किस्म का है!....मतलब कि यह 'बोविड फैमिली' याने कि ' गो-परिवारीय' पशु है!...इस प्राणी का स्वभाव शर्मिला होता है और यह मनुष्यों से दूर रहना ही पसंद करता है!... यह प्राणी आक्रामक भी नहीं होता!
.... इसकी पहचान है इसकी पीठ पर का उभार याने कि कूबड!...दूसरी पहचान, इसकी टांगों का निचला हिस्सा सफेद होता है!...इसका शरीर बचपन में भूर्व रंग का होता है....आगे उम्र बढने के साथ साथ गहरा भूरा और बाद में काला हो जाता है! इसकी लंबाई 8 फूट से लेकर 12 फूट तक की होती है और उंचाई लगभग 5 फूट से 7 फूट तक की होती है!... इसका वजन 1000 कि.गा. से 1500 कि.ग्रा. तक का होता है!.... वैसे मादा गौर का वजन काफी कम होता है!
....गौर के सींग अंदर की तरफ मुडे हुए होते है!... मजबूत होते है और सिर के पास पीले रंगके होते है और उपर की और काले रंग के होते है.... बडे ही सुंदर दिखतें है! सींग औसतन 32 इंच की लंबाई लिए हुए होते है! गौर के आंखों के उपर माथे का भाग थोडा अंदर धंसा हुआ होता है!.... शरीर के उपर चमकदार रोएं( बाल) होते है!
हमारे देश में गौर मध्य भारत, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी घाट में पाया जाता है!... दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी पाया जाता है!... वैसे भारत में इसकी संख्या अधिक है!.. यह पानी दल में याने कि ग्रुप में रहना ही पसंद करतें है!... 40 या 50 गौर, दल बनाकर रहतें है!... इनका नेत्रीत्व बडी उम्र की मादा ही करती है!... यह जंगलों में या वनों में रहतें है और सूखे मौसम में जल स्रोतो के नजदीक रहने चले जाते है!... मान्सून में ये पहाडों पर चले जाते है!
... घास इनका मुख्य भोजन होता है!... इन्हें पेडों के पत्ते, छाल और कोंपलें खाना भी पसंद है!... सुबह और दोपहर के बाद ये चारा लेते है और घनी दोपहरी में आराम से पेडों की छांव में बैठ कर जुगाली करतें रहतें है!...पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में इन्हे पालतु बनाता भी देखा गया है...वहां इन्हें मिथुन कहा जाता है!... यह नागालैंड राज्य का राजकीय पशु है!... इनकी देखने सुनने की क्षमता कुछ कम होती है... लेकिन सुंघने की क्षमता बहुत तेज होती है!... यही क्षमता इनकी रक्षा करती है!... इनके विशाल शरीर की वजह से दूसरे प्राणी इनसे दूर ही रहते है...कभी कभार बाघ ही इन पर आक्रमण करतें है....लेकिन ऐसे आक्रमण में बाघ ही घायल हो कर भाग खडे होते है!... तो फिर इन्हें खतरा तो मानवजाति से ही है! ....गौर को देखने के लिए पूर्वोत्तर राज्य की वाइल्ड लाइफ सैंचुरी की सैर आप जरुर कर सकतें है!
प्रकाशन तिथि:
अक्तूबर 22, 2009
ambalika के द्वारा और अधिक संक्षेपण
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