भारत का चन्द्रयान...चांद की धरती पर।
एक बहुत बडी खुश-खबर यह है कि अब भारत अंतरिक्ष में भी अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में
लिखवाने के लिए कटिबद्ध है। भारत चांद पर अपना मिशन चंद्रयान प्रथम 22 अक्टूबर के दिन भेजने जा रहा है। अब वो दिन दूर नहीं है, जब सायन्स के मास्टर माने जाने वाले राष्ट्रों के नामों की लिस्ट में भारत का नाम भी दर्ज होगा। हम भारतवासियों का सिर तब गर्व से इतना उपर उठेगा कि आसमान छू लेगा।
यह छोडा जानेवाला उपग्रह अपने आप में अनेक नवीनताएं समेटे हुए है। इसमें हाईरिज्योल्यूशन रिमोट सेसिंग के जरिए चन्द्रमा की तस्वीरे देखी जा सकेगी। इस उपग्रह में किसी भी तरह के एयरकंडीशन की जरुरत भी नहीं होगी।...इसका मतलब यह कि यह उपग्रह किसी भी प्रकार के तापमान से प्रभावित नहीं होगा।...इस उपग्रह द्वारा चन्द्रमा का पूरा नक्शा तैयार किया जा सकेगा, जो अभी तक उपलब्ध नहीं था।
इस अभियान की लागत ज्यादा नही होगी....लगभग 386 करोड भारतीय रुपये ( 83 मिलियन यूएस डॉलर) जितनी होगी। चौकिए मत। भारत की क्षमता पर भी हमें गर्व होना चाहिए। इसरो के पांच पेलोड के अलावा, इसमें छ्ह पेलोड बाहर की अंतरिक्ष एजंसिया नासा, ईएसए और बुल्गारिया स्पेस एजेंसी के है। 19 अक्टूबर की रात को लांच किए जाने वाले चन्द्रयान का मैकेनिकल, सोलर पेनल और इलेक्ट्रिकल टेस्ट किया जाएगा। इससे पहले इसरो, बैंगलुरू में इसका थर्मल और वाइब्रेशन टेस्ट किया जा चुका है। चन्द्रयान आंघ्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश घवन स्पेस सेंटर से प्रक्षेपित किया जाएगा।