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...Kidny Pratyaaropan ka Science!

लेखक : Hindustan, ambalika
संक्षेपक : ambalika
विजिट्स : 71  शब्द: 600   प्रकाशन तिथि: जनवरी 28, 2008
Science                         ...किडनी प्रत्यारोपण का विञान!
 
 
मानव शरीर में दो किडनीयां काम कर रही होती है. किसी बीमारी की वजह से या हादसे की वजह से जब किडनियां काम करना बंद कर देती है....तब मृत्यु निश्चित ही है. डायलॉसीस की मशीन की मदद से कुछ दिनों तक भले ही उस व्यक्ति को जिंदा रखा जाता हो...उसका जीवन समाप्ति की ओर ही अग्रसर हो रहा होता है.
 
 
ऐसे में सायन्स की यह खोज बड़ी ही उपयोगी सिद्ध हुई है कि....शरीर में अगर एक किडनी भी अपना काम सुचारु ढंग से कर रही हो, तो मनुष्य के शरीर का काम चल जाता है और वह मौत के मुंह में जाने से बच जाता है. ''किडनी का प्रत्यारोपण'' इसी लिए एक ज़रुरी प्रक्रिया है.
 
क़िडनी के प्रत्यारोपण के लिए सर्व-प्रथम प्राप्तकर्ता की जांच-परख की जाती है कि...वह इस योग्य है अथवा नहीं! अब दानकर्ता का भी परिक्षण योग्य चिकित्सक द्वारा किया जाता है कि वह किडनी दान करने योग्य व्यक्ति है अथवा नहीं!  यह जरुरी है कि वह किसी असाध्य रोग से पीडित न हो  और उसकी उम्र भी इसलिए देखी जाती है कि वह किडनी निकालने के बाद का जीवन कैसे बिना किसी परेशानी से व्यतीत कर सकता है!
 
 
अब बारी आती है...दानकर्ता और प्राप्तकर्ता के रक्त-समूह की! दोनों का रक्त समूह और एचएलए (ह्युमन ल्यूकोकाइट)एक होना ज़रुरी है. इसी हालत में प्राप्तकर्ता का शरीर दानकर्ता की किडनी को स्वीकार करता है. इस मिलान के लिए विशेषञ और आधुनिक प्रयोगशालाओं की ज़रुरत होती है.
 
मिलान के बाद प्राप्तकर्ता के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम करने के लिए दवाइयां दी जाती है.एक-दूसरे से सटे दो ऑपरेशन थियेटरों में डोक्टरों की अलग़ अलग़ टीमें दोनों व्यक्तियों का ऑपरेशन करती है. दानकर्ता के शरीरसे रक्त कोशिकाओं के साथ किडनी निकाली जाती है और इसे एक द्रव पदार्थ में रखा जाता है.उसके बाद प्राप्तकर्ता के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है.
 
 मृत व्यक्ति से प्राप्त किडनी को 24 घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकता है.प्रत्यारोपण के बाद प्राप्तकर्ता को किसी भी प्रकार के इंफेक्शन बचाने के लिए अकेले ही एक कक्ष में ठहराया जाता है. प्रतिरोधक क्षमता कम करने की दवाई के असर से प्राप्तकर्ता का शरीर हासिल हुई किडनी को जल्दी से स्वीकार कर लेता है.
 
वैसे प्राप्तकर्ता को जीवन में तकलिफों का सामना तो करना ही पड़ता है. इंफेक्शन का सामना भी करना पडता है. दवाइयों का सेवन उम्रभर करने की ज़रुरत पड़ती ही है.
 

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