एक ओर सरकारें
बिजली की बचत करने वाले बल्बों का प्रयोग बढ़ाने में लगी हुई हैं और दूसरी ओर विशेषज्ञों का कहना है कि
कॉम्पैक्ट फ़्लोरोसेंट
लाइट (सीएफ़एल) से लोगों को त्वचा में
चकत्ते हो सकते हैं और त्वचा के फ़ोटोसेंसेटिव होने का ख़तरा हो सकता है. ब्रिटेन की सरकार वर्ष 2011 से परंपरागत बल्बों के प्रयोग को प्रतिबंधित करने जा रही है. कई संस्थाओं का कहना है कि जो लोग पारंपरिक बल्बों का प्रयोग करना चाहते हैं उन्हें इसकी छूट दी जानी चाहिए. विशेषज्ञों ने इन बल्बों से कई तरह की बीमारियों की आशंका जताई है जिसमें त्वचा का रोशनी के प्रति संवेदनशील हो जाना, कई तरह की खुलजी
होना और त्वचा में चकत्ते होना आदि प्रमुख है.इससे सिर में दर्द की बीमारी माइग्रेन की भी शिकायत हो सकती है.बिजली उद्योग की ओर से कहा गया है कि जल्दी ही लोगों को हैलोजन और
एलईडी बल्ब भी उपलब्ध होंगे. बिजली की बचत करने वाले ये बल्ब पारंपरिक बल्बों की तुलना में एक चौथाई बिजली का ही प्रयोग करते हैं
''सीएफ़एल से त्वचा रोगों का ख़तरा'' (bbc.co.uk) के बारे में अधिक संक्षेप