Summarize Human Knowledge

.

श्वूंग होम>पुस्तक>हास्य और व्यंग>10. जंगल में मोर नाचा... (अंतिम कडी)

.

10. जंगल में मोर नाचा... (अंतिम कडी)

द्वारा : ambalika    

लेखक : anaya
 10. जंगल में मोर नाचा... (अंतिम कडी)
............तो साहबान।...मोर कहीं भी नाच सकता है।... जंगलमें , बाजार में,
घर में, हॉट्ल में, कोर्ट में... बस!... मोर का नाचने का मूड होना चाहिए।... हमने खुद मोर को सर्कस में नाचतें देखा है।..खैर! अब सरकस भी गुजरे जमाने का खेल हो गया, अब हम मन ही मन कल्पना कर रहे है कि मोर वेब्-साइट पर नाच रहा है?...आप की अपनी कल्पना के बारे में जरुर लिखें... इसके लिए हमारा कॉमेंट्बॉक्स हाजिर है साहब।.. आपके कॉमेंट पर हमारा करारा कॉमेंट भी होग।
.............तो हुआ ये कि चौपट्जी को ले कर गगन, मगन और चौपट्जी की बीटिया हस्पताल पहुंच गए... चौपट्जी का इलाज शुरु हुआ और चौपटजी सीधे उपर जाने कि बजाये...नीचे ही रह गए।.छगन की भगवान से, उन्हें उपर बुलाने के लिए की गई प्रार्थना विफल हो गई।..मगन की प्रार्थना विफल होने का तो सवाल ही नहीं थाः क्यों कि उसने भगवान से कोई बात की ही नहीं थी।...देना ने जरुर आंसू बहाएं थे; जो भगवान की नजर में चढ गए और चौपट्जी जाते जाते रुक गए।
..लेकिन अब चौपट्जी, पहलेवाले चौपट्जी नहीं थे।...उनकी आंखों से गुस्से के बदले प्यार की बारिश हो रही थी। जब उनको पता चला कि छ्गन और मगन ने टैक्सी का किराया खर्च किया है, तो वे मारे खुशी के बाग बाग हो उठे।... अब उनके मन का मोर अंगडाई लेता हुआ हस्पताल के बिस्तर पर उठ कए बैठ गया और नाचने के लिए उसने पंख...हाथ..खोल दिए।
.............छगन और देना को अपनी दोनों बाहों में भरते हुए उन्हों ने छगन को अपना दामाद बनाने का एलान वहीं पर कर दिया।...अब हपताल के उस कमरे में छगन और देना फिरकी लेते हुए नाचने लग गए।
........मोटा मगन पांव पटकने लगा कि अब उसका क्या होगा।... खैर।... वह अपनी ही धुन में गाने लगा..
.............' जंगल में मोर नाचा...किसीने न देखा।...हम जो थोडीसी पी के जरा झुमें....'...कहते हुए वह सिर पकड कर नीचे बैठ गया...हस्पताल में उसके पीने का इंतजाम होना ना मुमकीन था।
.... समाप्त

प्रकाशन तिथि: फरवरी 19, 2009
कृपया इस सार का मूल्यांकन करें : 1 2 3 4 5

Bookmark & share this post

.