Summarize Human Knowledge

.

.

8.जंगल में मोर नाचा…

द्वारा : ambalika    

लेखक : anaya
  8.जंगल में मोर नाचा…  
” देनाजी! बहुत अच्छा लग रहा है, जो आज आपसे मुलाकात हो गई!…वरना वो टकला ‘चौपट ‘ तो…”…छगन
अपनी ही धुन में बोलता जा रहा था.  
” क्या कहा मेरे पिताजी चौपट, टकला?” देना गुस्से से तमतमाती हुई बोली और जाने के लिए खड़ी हो गई.  
…अब छ्गन को अपनी गलती समझ में आ गई और वह लिपापोती की कोशिश में फौरन जुट गया. खड़ी हुई देना को वापस हाथ पकड़ कर कुर्सी पर बैठाते हुए बोला… 
 ” मै तो आपके पिताजी को चौपट अंकल कहता हूं देनाजी! और टकला मै मगन को कहता हू!…देखिए ना वो टकला अभी तक कोल्ड्रिंक ले कर नहीं आया..अब तो हद हो गई!”   
” मगन के तो लंबे घने बाल है!….वह टकला कहां है? और जिसे आपने चौपट कहा वह कौन है?” देना का शक अभी दूर हुआ नहीं था.  
 ” मगन मेरा बचपन का दोस्त है…बचपन में जब उसके सिर पर बाल नहीं थे; तब सभी उसे टकला ही कहते थे…अजी मै तो अब तक कह रह हूं देनाजी!…हा, हा, हा!” छगन ने हंसने की कोशिष की और आगे बोला..
” और चौपट तो हमारा धोबी है, जो कपड़े इस्त्री करता है!” …कहते हुए छ्गन ने इस्त्री करने का अभिनय कर दिखाया और देना हंस  पड़ी!  
” छग्गुजी!..” …देना अब छ्गन की तरफ प्यार भरी नजरों से देख रही थी…आगे बोली..
” मगन तो अब तक नहीं आया, मै अब जाऊ?”  
” नही देनाजी! वो आता ही होगा!.. बस थोड़ी देर और रुक जाइए प्लीज्..”  
…और छगन मगन को मगन आता दिखाई दिया…‘बेवकूफ इतनी जल्दी आने की क्या जरुरत थी?” छगन मन ही मन बोल पडा और फिर एकदम से जोर से बोला..” और आधा घंटा देर से नहीं आ सकता था; मगने के बच्चे?”  
” ये क्या कहा आपने! मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा!” देना ने कहा और देखा तो मगन दरवाजे से अंदर आ रहा था और उसके पीछे चौपटजी का टकला सिर दिखाई दे रहा था.
..मतलब कि वहां चौपटजी भी पहुंच गए थे और सारा प्रोग्राम चौपट हो गया था.   
..... jaari

प्रकाशन तिथि: फरवरी 16, 2009
कृपया इस सार का मूल्यांकन करें : 1 2 3 4 5

Bookmark & share this post

.