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हास्य-व्यंग्यःलल्लू लगावें, सल्लू गिरावें
हास्य-व्यंग्यःलल्लू लगावें, सल्लू गिरावें
........ फारसी में कहावत है- 'हरचे आमद इमारते नो साख्त' मतलब कि
जो भी आया उसने एक नई इमारत बनवाई... अब ईमारत भले ही टेढी-मेढी क्यों न बनी हो, कुछ ही दिनों मे ' राम बोल ' भी हो सती है; पर बनवानी बेहद जरुरी है।.... क्यों कि जताना जरुरी है कि हम भी दम्-खम रखतें है।... शिलान्यासों के कितने ही पत्थर बिखरे पडे है, जो धोबियों को कपडे धोने में बेशक काम आ रहे है।
...........एक ने मूर्ति लगवाई और दूसरे ने आते ही उखडवा कर ढेर कर दी....यह भी हो सकता है कि आने वाले दिनों में फेरीवाले ठेले पर मूर्तिया लादे आवाज लगाए...' मूर्तिया लगवालो भाई लोगों.....ले लो जी... छ्त पर, बालकनी में, चबूतरे पर... कहीं भी सजाओ... एक खरीदो, दूसरी मुफ्त पाओ।
............ योजनाओं का भी यही हाल है.... एक ने आ कर बनाई तो दूसरे ने आ कर रद्द कर दी। .... फिर क्या हुआ?... बुश ने बनाई और ओबामा ने ठंडे बस्ते में डाल दी तो क्या हुआ।अब ओबामा नई योजनाएं बना रहे है।... पावर में आ कर अगर आप अगर योजना भी नहीं बना सकतें, तो पावर में आना बेकार है।... यह भी तो सोचें कि' लोग क्या कहेंगे?.... अब देखिए तो जरा.... बुश साहब ने पाकिस्तान को गोद में लिटा कर बोतल से दूध पिलाया... बहुत अच्छा किया था जी।.... लेकन ओबामा ने आते ही बोतल दूर फेंक दी और तडाक से पाकिस्तान की सहायता राशी में ५ करोड, ५० लाख डॉलर की कटौती कर दी.... बेचारे जरदारी रो पडे, कहने लगे...' हाय अब्बा। मेरा कसूर तो कोई बताएं?... माल क्यों छिन लिया गया?....अब बच्चों का( आतंकवादिओं का) क्या होगा?.... उनका खर्चा कैसे चलेगा? ......क्या लंगोटा बांध कर बम फेंकने जाएंगे?'
.... ...........मेरे यू.पी.बरेली जनपद में एक अति पावरफुल महिला ने रेल कोच फैक्ट्री का शिलान्यास किया....इस पर दूसरी पावरफुल महिला भडक उठी।.....बोली' दुबारा क्यों शिलान्यास क्यो?....५-६ वर्षों में कोच फैक्ट्री क्यों नहीं बनवाई?.... अब दूसरी पावरफुल महिला को कौन समझाएं कि शिलान्यास और निर्माण में कई सालों का अंतर होता है।... और जरुरी नहीं कि सारे शिलान्यासों की तब्दिली निर्माण कार्य में हो।... कौवों के बैठने की जगह भी तो शिलान्यास ही होते है।
............. अब जाते जाते वसीम बरेलवी का एक शेर याद आ रहा है, आप सुनते जाइए.....'हर शख्स दौडता है यहां भीड की तरफ.... फिर यह भी चाहता है कि उसे रास्ता मिलें।'
प्रकाशन तिथि:
फरवरी 11, 2009
ambalika के द्वारा और अधिक संक्षेपण
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