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Aise Rishte Jo...Ni:shabda Hai!

Summary rating: 4 stars 2 समीक्षा
लेखक : Hindustan,ambalika
Review by : ambalika
विजिट्स: 155
शब्द: 600
प्रकाशन तिथि: फरवरी 27, 2008
Romance                              ऐसे रिश्ते जो...निःशब्द है!
 
छोटी उम्र की लड़कियों का अपने से लगभग दुगुनी उम्र से पुरुषों के प्रति आकर्षण...होना चहिए या नहीं?...क्यों होता है?...इससे समाज पर क्या असर पड़ता है?...सवाल अनेक है.जवाब भी कई है, लेकिन आखिर जवाब ''''निःशब्द'''' बनकर ही रह जाता है.
 
प्रसिद्ध रशियन लेखक व्लादिमीर नाबाकोव का एक उपन्यास 1955 में पब्लिश हुआ था. इसकी कहानी कुछ इस तरह से है कि एक बारह साल की लड़की एक वयस्क पुरुष के प्रेम में पड़ जाती है.उस ज़माने में इस उपन्यास के लेखक पर तरह तरह के आरोप लगे थे कि ऐसी कहानी का समाज़ पर बुरा असर पड़ गया और एक पूरी पीढी बर्बाद हो गई.
 
...तो कहने का मतलब यह कि ऐसे रिश्ते को न तो समाज ने कभी पहले मान्यता दी थी; और न तो अब ही दे रहा है.
 
प्रसिद्ध अभिनेत्री सायराबानों ने अपने से दुगुनी उम्रके अभिनेता दिलीप कुमार से जब शादी की थी...तब भी यह शादी चर्चा का विषय बनी थी.
 
भारत के पौराणिक ग्रंथ भी इस विषय से अछूते नहीं है.कई बुझुर्ग ऋषि-मुनिओं की युवा कन्याओं से विवाह रचाने की कहानियां प्रसिद्ध है.मतलब कि यह चलन तो पुराना ही है.
 
पहले इस प्रकार के विवाह या प्रेम कहानियों को दबा-छिपा कर ही रखा जाता था, लेकिन अब इसे खुले आम समाज़ के सामने लाने का चलन ज़ोर पकड़ रहा है.मटुकनाथ और जूली की कहानी को टी वी चैनल और अखबारों खूब हवा दी.उनकी तरह तरह की फोटोएं और इंटरव्यू मनोरंजन के तौर पर पेश किए गए.उन दोनों को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं थी.नैतिकता या अनैतिकता का कोई सवाल उठा भी तो,उसे नज़र-अंदाज़ कर दिया गया.
 
कहते है कि भावनात्मक सुरक्षा को ले कर ही युवा लड़कियां बुज़ुर्ग पुरुषों का हाथ थाम लेती है.फाइनेशियल सिक्योरिटी को भी नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता! एक संघर्षरत युवा पुरुष के पास इतनी धन-दौलत और सुख-सुविधाएं नहीं हो सकती; जो जीवन के कई क्षेत्रों में विजय हासिल करने वाले वयस्क पुरुष के पास हो सकती है.
 
वैसे वयस्क पुरुषों को भी युवा लड़की को अपनी तरफ आकर्षित करने का मानसिक समाधान ऐसे रिश्ते से उपलब्ध होता है.मतलब कि बस! अंडरस्टेंडिंग का मामला है.गैर सरकारी वुमन पावर कनेक्ट की अध्यक्ष रंजना कुमारी कहती है,''''यदि एक बालिग लड़की अपनी इच्छासे बड़ी उम्र के पुरुष से प्रेम करती है तो मै इसे ग़लत नहीं मानती! यह उसका अपना निर्णय है...लेकिन अगर कोई लड़की शोषण करवाने के लिए तैयार है तो आप क्या कर सकतें है!''''
 
एक युवा लड़की,जो ऐसा ही रिश्ता बनाएं हुए है;कहती है कि,''''इसमें बुराई क्या है?...समाज़ को इससे क्या लेना देना है?...यह तो व्यक्तिगत फैसला है.समाज़ तो क्या इसमें कानून को भी कुछ कहने का हक नहीं है!''''
 
इसी विषय को लेकर ''''निःशब्द''''और''''चीनी कम'''' जैसी फिल्में बनी है.
 
 
 
 
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