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राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !

द्वारा : vivekranjan    

लेखक : प्रो सी॑ बी श्रीवास्तव विदग्ध
राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !
प्रो सी॑ बी श्रीवास्तव विदग्ध
Jabalpur (M.P.) 482008
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हो रहा आचरण का निरंतर पतन
राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !
हैं जहाँ भी कहीं हैं दुखी साधुजन लेके उनकोशरण क्यों बचाते नहीं !
है सिसकती अयोध्या दुखी नागरिक कट गये चित्रकूटों के रमणीक वन
स्वर्णमृग चर रहे दण्डकारण्य को पंचवटियों में बढ़ गया है अपहरण
घूमते हैं असुर साधु के वेश में अहिल्याये कई फिर बन गईं हैं शिला
सारी दुनियाँ में फैला अनाचार है रुकता दिखता नहीं ये बुरा सिलसिला
हो रहा गाँव नगरों में सीता हरण राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !
सारे आदर्श बस सुनने पढ़ने को हैं आचरण में अधिकतर है मनमानियां
जिसकी लाठी है उसकी ही भैंस है राजनेताओं में दिखती हैं नादानियां
स्वप्न में भी न सोचा जो होता है वो हर समस्या उठाती नये प्रश्न कई
मान मिलता है कम समझदार को भीड नेताओं की इतनी है बढ़ गई
हर जगह डगमगा गया है संतुलन राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !
बढ़ती जाती है कलह हर जगह बेवजह नेह सद्भाव पडते दिखाई नहीं
एकता प्रेम विश्वास हैं अधमरे आदमियत आदमी से हुई गुम कहीं
स्वार्थ सिंहासनों पर आसीन है कोई समझता नहीँ किसी की व्यथा
मिट गई रेखा लक्षमण ने खींची थी जो राम जाने कि क्यों राम आते नहीं !
 
 

 
प्रकाशन तिथि: फरवरी 14, 2008
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टिप्पणियाँ

  1. 0 समीक्षा 14 फरवरी 2008
    1

    richa verma

    kya bat hai

    ati prabhavi rachna

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