संकल्प
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प्रकाशन तिथि: दिसम्बर 01, 2007
कुमार आशीष द्वारा रचित नाटक ''संकल्प'' यद्यपि सत्य को अन्ततोगत्वा लक्ष्मी के ऊपर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से रचा-बुना गया है, तथापि यह अपनी बुनावट में अनेक समसामयिक लौकिक तथा दार्शनिक समस्याओं पर गहन विचारोत्तेजक दृष्टि-रश्मियों को समेटे हुए है। नाटक का प्रधान नायक सत्यकेतु भारतीय नरेशों की उस सनातन कल्पना का प्रतिनिधित्व कर रहा है जो जीवन के समस्त प्रेयस् तथा श्रेयस् को तिलांजलि दे सकते हैं, किन्तु सत्य को नहीं।
नाटक में सात दृश्य हैं। प्रथम दृश्य में सूत्रधार और नटी नाटक का सूत्रपात करते हैं। द्वितीय दृश्य में सत्यकेतु एवं कंदर्प का संवाद मुख्य है जहाँ व्यक्ति एवं व्यवस्था के अर्न्तसम्बन्धों की ओर इंगिति है। अंतत: सत्यकेतु प्रजा के प्रत्यक्ष भरणपोषण का दायित्व स्वीकार करता है। तृतीय दृश्य में इन्हीं प्रश्नों पर थोड़ी और दृष्टि, साथ ही सत्यकेतु के राज्य पर आसन्न संकट की भविष्यवाणी। चतुर्थ दृश्य में इन्द्र की सत्यकेतु की परीक्षा लेने हेतु कटिबध्दता। पंचम् एवं षष्ठम् दृश्य में एक वणिक् के रूप में राजा सत्यकेतु के साथ छल। सप्तम एवं अंतिम दृश्य में सत्यकेतु की सत्य के प्रति प्रतिबध्दता के कारण ऐश्वर्य का पुनरावर्तन। नाटक पठनीय एवं मंचन की दृष्टि से भी उपयुक्त है।