जब-जब धरती पर त्राहि-त्राहि मची, अत्याचारियों के अत्याचार बढ़े, तब-तब भगवान ने अवतार लिया और धरती से पाप व अत्याचार को मिटाकर धरती का उद्धार किया।..दो अक्षर से बने राम नाम की महिमा भी अपरंपार है।
तेत्रा युग में रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ एवं महारानी कौशल्या के यहाँ अखिल ब्रम्हांड नायक अखिलेश ने पुत्र के रूप में जन्म लिया था।
रामजन्म के कारण ही चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी कहा जाता है। रामनवमी के दिन ही गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना का श्रीगणेश किया था। भगवान राम हमारे जीवन के प्रत्येक रंग में समाए हुए हैं।
कवि रवीन्द्र ने वाल्मीकि रामायण से प्रभावित होकर उसके वैशिष्ट्य का प्रतिपादन करते हुए कहा है, 'इसमें आदर्श गृहस्थ जीवन व्यतीत करने के मार्ग का विस्तृत वर्णन है।
रजनीश ने कबीर के इस परम सत्य की सुंदर व्याख्या की है। गोस्वामी तुलसीदास के सखा अब्दुल रहीम खान-ए-खाना ने कहा है कि रामचरित मानस हिन्दुओं के लिए ही नहीं, मुसलमानों के लिए भी आदर्श है।
रहीम ने अनेक राम कविताएँ भी लिखी हैं। इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम देश में भी रामकथा की शक्ति व सुगंध को सरलता से देखा जा सकता है।
राम की महिमा के बारे में अधिक संक्षेपण