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बात उस रात की.......----2

द्वारा: AnujKumar     लेखक : Ashwani Tanwar
ª
 
वह उस रात फिर से 10 बजे वहाँ पहुँच गया।लेकिन उस रात वह नहीं हुआ जो रोज होता था।
उस रात अमावस्या की काली रात थी।उसने फिर से पढाना प्रारंभ किया।
तभी उस रात जोरो की वर्षा शुरु हो गई।
उस ने सोचा कि बच्चों की जल्दी छुट्टी कर देते हैं। यही उसकी उस रात सबसे बड़ी गल्ती थी।
उस ने स्कूल की रात में बारह बजे छुट्टी कर दी थी।
लगभग आधी रात को सभी बच्चे जा चुके थे सिवाय उस बच्चे के।वह फिर से उस रात तालाब के पास चला गया।
वह टीचर भी अपने घर की ओर चल दिया। वर्षा तेज हो चुकी थी। जोरो की आँधी चलने लगी थी।
रास्ते में उसे एक भिखारी मिला।उस ने ठंड के मारे एक बड़ा सा कंबल लपेट रखा था।
उसका मुँह भी पूरी तरह ढका हुआ था। उस टीचर ने उस पर दया कर उसे एक बिस्कीट का पैकेट दे दिया।
पर भिखारी ने कहा कि वह इसे खाएगा कैसे, उसके हाथों में तो चोट लगी हुई है।
टीचर ने कहा कि मैं खिला देता हूँ।
उस ने उसके मुँह से कंबल हटाया।
उसके हाथ से पैकेट गिर गया। उसके दिल की धड़कनें तेज हो गयी।
उस भिखारी के मुहँ पर एक जलन का दाग था। इससे उसका मुँह पूरी तरह से काला पड़ गया था। उसके मुँह पर न तो आँखें थी, न ही नाक, न ही कान और न ही बाल।
बस था तो सिर्फ काला अँधेरा और काली परछाई।
वह डर के मारे अपने स्कूल की और वापस भागने लगा।
तभी वह अपने स्कूल के गेट तक पहुँचा।
अँधेरा बहुत घना हो चुका था।
वहाँ स्कूल का चौकीदार हाथ में लालटेन लिये खड़ा था।
उस टीचर ने उसे सारी बात बताते हुए आखिर में कहा कि उस के मुँह पर न तो आँखें थी, न ही नाक, न ही कान और न ही बाल।
लालटेन ऊपर करते हुए, “ आप का मतलब ऐसे साब जी”।
वह रात………वह भिखारी………वह मौत……….।
प्रकाशन तिथि: 23 मई, 2009   
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