.

सर्च
×

साइन अप

Use your Facebook account for quick registration

OR

Create a Shvoong account from scratch

Already a Member? साइन इन!
×

साइन इन

Sign in using your Facebook account

OR

Not a Member? साइन अप!
×

साइन अप

Use your Facebook account for quick registration

OR

साइन इन

Sign in using your Facebook account

Subscribe
श्वूंग होम>पुस्तक>रहस्य और रोमांच

रहस्य और रोमांच

    सर्च

क्या भुत प्रेतात्माएँ होती हें ? इसके पीछे का सच जाने

(2 समीक्षा)
लेखक : amit tomar   Review: AmitTomar
क्या भुत प्रेतात्माएँ होती हें ? इसके पीछे का सच जाने.
Read Review
प्रकाशन तिथि: 14 फरवरी 2013 विजिट्स: 56 शब्द : 600

पिया गए परदेस....

लेखक : निर्मल कुमार   Review: ambalika
चले भी गए तो क्या... ना कोई चिठ्ठी आई..न कोई संदेशा... अब तो तूफ़ान भी थम गया है मन का... जो बार बार देता था हमें जुदाई का अंदेशा...
Read Review
प्रकाशन तिथि: 26 अक्तूबर 2012 विजिट्स: 15 शब्द : 300

परियों के देश से सुन्दर...अपना देश!

लेखक : दिवाकर   Review: ambalika
न कही गंदगी का नामों निशाँ... स्वच्छता की कहानी कहती हर गली... क्या बाग बगीचे...क्या छोटीसी वाटिकाएं... हर जगह मुस्कुराती हुई हर कली... सुबह का पैगाम ले कर निकलता अलबेला सूरज... शाम को नजर आती स.
Read Review
प्रकाशन तिथि: 23 अक्तूबर 2012 विजिट्स: 11 शब्द : 300

...नहीं लिखनी नई कहानी!

लेखक : मनोहर दर्शन   Review: ambalika
इस रास्ते पर आगे बढ़ने में... मदद भी मिल रही थी हमें पूर जोर में... खिंच रही थी अपनी और नशीली निगाहें.. बाँध भी रही थी हमें...रेशम जैसी जुल्फों की डोर में... रास्ता टटोल रहे थे हम...हौले हौले से.
Read Review
प्रकाशन तिथि: 23 अक्तूबर 2012 विजिट्स: 7 शब्द : 300

जब आई थी पहली बहार!

लेखक : narendra kumaar   Review: ambalika
और बहार को ले कर... वो कम बख्त घनी झाडियों में घुस गया... हम करते रहे खड़े खड़े इंतज़ार... अब आएगा वो..तब आएगा वो.. चक्कर लगाते रहे बार...
Read Review
प्रकाशन तिथि: 15 सितम्बर 2012 विजिट्स: 22 शब्द : 600

केले का भोज-08

(1 समीक्षा)
लेखक : chal jhooti   Review: rimjim
जिस किसि को भि हो मै पसंद उसके दरवाजे पे मेरा बुलावा आया है, "निशा, सुन रही हो ना। अगर मना करना है तो अभी करो।" "निशा, तुम.... मैं नहीं चाहता, लेकिन इसमें तुम पर...
Read Review
प्रकाशन तिथि: 29 जुलाई 2012 विजिट्स: 44 शब्द : 900

...सावन के महीने में....

(1 समीक्षा)
लेखक : p. santosh   Review: ambalika
क्या वह भी कर रही थी सावन का इंतज़ार?... क्या कर रही थी वह मुझसे सच्चा प्यार?... लेकिन मैं तो उसके प्यार का मारा ना था... मैं तो बस!...उसके बदन का दीवाना था...
Read Review
प्रकाशन तिथि: 27 जून 2012 विजिट्स: 50 शब्द : 600

कैसा था यह मिलन हमारा...

(3 समीक्षा)
लेखक : santosh kumar   Review: ambalika
बिजली के कडकने से...बादलों के बरसने से .... झूमते पेड़ों की बढ़ती हुई सांय-सांय.... मिलाती रही तन से तन...मन से मन.... न रही परवा तब रस्मों रिवाजों की.... न रही चिंता ...पत्थरदिल दुनियावालों की..
Read Review
प्रकाशन तिथि: 11 जून 2012 विजिट्स: 45 शब्द : 300

कल्पना के पंख होते है बहुत सुन्दर!

लेखक : संतोष कुमार   Review: ambalika
कल्पनाओं के पंखों पर सवार होना, है बहुत आसान!...
Read Review
प्रकाशन तिथि: 04 जून 2012 विजिट्स: 48 शब्द : 300

जब उनके पीछे पड़ गया मै!

(1 समीक्षा)
Review: ambalika
आशिक थे हम बहुत पुराने.... लेकिन टूट गया हमारा भरम... हैंडसम समझते थे हम खुद को... अब फूट रहे थे हमारे करम.....
Read Review
प्रकाशन तिथि: 05 नवम्बर 2011 विजिट्स: 59 शब्द : 600
  • सबसे ज्यादा प्रसिद्ध लेख देखें

मां सरस्वती जब प्रसन्न हुई...कवि कालीदास पार्ट-17

(1 समीक्षा)
लेखक : amba   Review: ambalika
साधु तो रमता जोगी'' होते है...एक जगह पर वे ज्यादा ठहरते नहीं है!...फिरभी कालीदास के गुरुजी ने तो यहां तीन-चार साल व्यतीत कर ही दिए!....इसे माता सरस्वती की कृपा ही कहा जाएगा!...और एक दिन अचानक जैसे साध.
Read Review
प्रकाशन तिथि: 06 अगस्त 2011 विजिट्स: 47 शब्द : 600

आज की ढलती हुई शाम...तेरे नाम!

(5 समीक्षा)
लेखक : santoshi   Review: ambalika
अपने आगोश में ले लिया मुझे.... अपने सीने से लगा लिया मुझे... उसके सीने में भी थे आग के शोले... मेरे सीने में उतर गए..नाजुक से दो गोले...
Read Review
प्रकाशन तिथि: 03 फरवरी 2011 विजिट्स: 474 शब्द : 600
अधिक
  • उच्चतम मूल्यांकन

विद्योत्तमा और कालीदास का मिलन...कवि कालीदास, पार्ट-19

(1 समीक्षा)
लेखक : amba   Review: ambalika
और विद्योत्तमा कुछ दास-दासियों को साथ ले कर जंगल की और चल पडी...जहाँ कवी कालीदास का ठीकाना था!...घना जंगल पार करने के बाद वह एक सुन्दर सी वाटिका में प्रवेश कर चुकी....चारों और सुन्दर फूलों के झुरमुट ह.
Read Review
प्रकाशन तिथि: 30 अगस्त 2011 विजिट्स: 56 शब्द : 600

Klon Maker-story-part-22

(1 समीक्षा)
लेखक : amba   Review: ambalika
भैया मेरे से गलती हो गई है...रेखा की लाश मेरे सामने पड़ी है!...क्या करूं?..दिमाग कुछ काम नहीं कर रहा!...लगता है अब बाकी की जिंदगी मुझे जेल में सड़ते हुए.
Read Review
प्रकाशन तिथि: 22 नवम्बर 2010 विजिट्स: 45 शब्द : 900

केले का भोज-08

(1 समीक्षा)
लेखक : chal jhooti   Review: rimjim
जिस किसि को भि हो मै पसंद उसके दरवाजे पे मेरा बुलावा आया है, "निशा, सुन रही हो ना। अगर मना करना है तो अभी करो।" "निशा, तुम.... मैं नहीं चाहता, लेकिन इसमें तुम पर...
Read Review
प्रकाशन तिथि: 29 जुलाई 2012 विजिट्स: 44 शब्द : 900
अधिक

.

इस श्रेणी में रहस्य और रोमांच समीक्षाएं, किताबों के सारांश और लेखों के सार तत्वों और रहस्य और रोमांच से संबंधित शैक्षिक पेपर शामिल हैं. प्रत्येक प्रस्तुति श्वूंग समुदाय के सदस्यों द्वारा बनाई जाती है. क्या आप अपना लिखना चाहते हैं? अधिक जानकारी प्राप्त करें इस बारे में कि कैसे ऑन लाइन धन कमाया जाए!