लिटिल रेड राइडिंग हुड
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प्रकाशन तिथि: नवम्बर 11, 2005
यह एक छोटी, प्यारी लड़की रेड की कहानी है। इस कहानी में दर्शाया गया है कि यह लड़की बहुत ही भली है और हमेशा दूसरों की मदद करती है। एक बार उसकी मां उसे एक टोकरी भर खाने की चीजें देकर कहती है कि जा इसे नानी को दे आ। रास्ते में रेड को एक भेड़िया देख लेता है और वह उसे अपने मार्ग से विचलित करने की कोशिश करता है, लेकिन रेड उसकी बातों में नहीं आती। जब रेड भेड़िए से नानी के घर का रास्ता पूछती है तो भेड़िया उसे एक लंबा रास्ता बता देता है और स्वयं एक छोटे रास्ते से नानी के घर पहले ही पहुंच जाता है। वहां वह उस बूढ़ी स्त्री को खा जाता है और उसके कपड़े पहनकर उसकी पलंग पर लेट जाता है। जब नन्हीं रेड नानी के घर पहुंचती है, तो उसे शक होता है कि यह उसकी नानी नहीं है। छोटे बच्चे की मासूमियत से वह भेड़िए से अनेक सवाल करती है यह जानने के लिए कि क्या वह सचमुच ही उसकी नानी है। उसके अनंत सवालों से भेड़िए का सब्र टूट जाता है और वह रेड पर झपटकर उसे निगल जाता है। लेकिन यह इस कहानी का अंत नहीं है। पास से गुजरनेवाला एक शिकारी कुटिया से आ रहा कोलाहल सुननकर वहां आता है और वह भेड़िए को काट डालता है, जिससे रेड और उसकी नानी उसके पेट से जिंदा बाहर निकल आते हैं!
यह कहानी एक परिचित लोक कथा है जो सदियों से बच्चों का मन बहलाती आ रही है। इसमें यही नसीहत दी गई है कि अच्छा काम करनेवालों के साथ अंत में अच्छा ही होता है, और बुरा करनेवालों का अंत हमेशा बुरा ही होता है।