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रोबिनसन क्रूसो

Summary rating: 2 stars 2 समीक्षा
Review by : Balasubramaniam
विजिट्स : 479  शब्द: 600   प्रकाशन तिथि: नवम्बर 11, 2005
निम्नलिखित भाषा से यह संक्षिप्त लेख अनूदित हुआ Robinson Crusoe (Illustrated Classics)
जब डेनिएल डीफो ने अपना प्रथम उपन्यास रोबिनसन क्रूसो वर्ष 1719 में प्रकाशित कराया तो वह 60 साल का हो गया था। इसमें एक अंग्रेज नाविक की कहानी है जिसका जहाज बीच समुद्र में क्षतिग्रस्त हो गया और उसके सभी साथी समुद्र में डूब गए। केवल वह बचा रह गया। वह इसके बाद 28 सालों तक दक्षिणी प्रशांत महासागर के एक वीरान टापू में जीवित रहता है। इस उपन्यास में उसके अकेलेपन एवं मानव संगति की तरस का सुंदर चित्रण हुआ है। वह अपने आप ही एक घर बनाता है, मकई, जौ आदि की खेती करना सीखता है और रोटी बनाकर खाता है। यह पुस्तक एलेक्सैंडर सेलक्रिक नामक एक नाविक के जीवन में घटी वास्तविक घटना पर आधारित है, लेकिन डीफो ने उसमें अपनी मान्यताएं एवं रुचियां भी जोड़ दी हैं। बचपन से ही डीफो को यात्रा करने में रुचि थी। अस्मिता, दैनंदिन के जीवन की बारीकियां आदि विषयों को लेकर उसने गहन चिंतन किया था। ये सब बातें पुस्तक में भी आ गई है। डीफो ने जीवित रहने के लिए क्रूसो के संघर्ष की कहानी को एक ऐसे व्यक्ति की कहानी में बदल दिया है जो अत्यंत विषम परिस्थितियों में रहते हुए भी अपने आप पर और अपने परिवेश पर पूर्ण नियंत्रण पा लेता है और केवल जीवित ही नहीं रहता, बल्कि खूब तरक्की भी करता है। जब मैन फ्राइडे के रूप में उसे एक मानव साथी प्राप्त होता है, जिसे वह आदमखोर कबीलों से बचाता है, तो डीफो को निजी स्वातंत्रय एवं उपनिवेशवाद जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त करने का भी मौका मिल जाता है। जब से यह पुस्तक प्रकाशित हुआ, वह निरंतर लोकप्रिय बना रहा है और उसने अनेक पुस्तकों, चलचित्रों और टीवी धारावाहिकों को प्रेरित किया है। लोग उसमें वर्णित साहसिक कारनामों को पढ़-पढ़कर नहीं अघाते। ऐसे लोग तक जिन लोगों ने इस पुस्तक को नहीं पढ़ा है, और कभी नहीं पढ़ेंगे, रोबिनसन क्रूसो और उसके निर्जन टापू के बारे में जानते हैं।

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