कीमियागर
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प्रकाशन तिथि: अप्रैल 15, 2007
पाठको को अपने सपनो को पूरा करने की प्रेरणा देनेवाला पाउलो कोएल्हो का उपन्यास द आलकेमिस्ट आज तक की सबसे ज्यादा बिकनेवाली किताबो में गिनी जाती है. आशावाद और विधेयात्मक विचारधारा से लबालब यह उपन्यास सांटियागो की कहानी है. सांटियागो एक चरवाहा है जो एक गुप्त खज़ाने की खोज़ में अपने घर से स्पेन और वहां से ईजिप्त की मरूभूमि का प्रवास करता है. एक कीमियागर के साथ भाग्यसूचक मुलाकात से उसका जीवन के प्रति द्रष्टिकोण बदल जाता है. बाद में उसे पता चलता है कि असली खज़ाना व्यक्ति के हृदय में ही छुपा हुआ पडा है. असल में पॉर्टुगीझ भाषा में लिखा गया यह उपन्यास सबसे पहले ब्राज़िल में 1988 में प्रगट हुआ था. छप्पन भाषाओ में अनुदित हो चुकी यह किताब कई देशो की पाठशालाओ में स्वीकृत की गई है जिसमें छात्रो को खास आवृत्तियाँ दी जाती है. बहेतरीन ढंग से लिखे गये इस उपन्यास में लेखक कोएल्हो एक संदेश छोड जाते है कि हमे हमारे भाग्य को टालना नहीं चाहिए. यह बोधकथा से पाठक को अनुभूति होती है कि जीवन के पथ पर बिखरी हुई आसान सी चीज़ो में खुशी समाई होती है. कोएल्हो यथार्थ ही कहते है कि "आसान चीज़े सब से ज्यादा किंमती होती है और सिर्फ समझदार लोग इसकी कदर करते है". एलन आर. क्लार्क का अंग्रेज़ी अनुवाद सुबोध है और पाठक के मन पर गहरी असर छोड जाता है. यह उपन्यास सचमुच आपके चहेरे पर मुस्कान लायेगा और आपकी आशाओं को बल प्रदान करेगा.