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कितना जानते हैं हम श्रीराम के विषय में

Summary rating: 3 stars 3 समीक्षा
लेखक : GK Awadhiya
Review by : GK Awadhiya
विजिट्स: 576
शब्द: 300
प्रकाशन तिथि: सितम्बर 26, 2006
कैसी विडंबना है कि हमारे देश के आज का युवा वर्ग रामायण को रामानंद सागर के नाम से जानता है जब कि उसे महर्षि वाल्मीकि एवं संत तुलसीदास के नाम से जानना चाहिये, वैसे ही महाभारत को बी.आर. चोपड़ा के नाम से जानता है जब कि उसे महर्षि वेद व्यास के नाम से जानना चाहिये.मेरा मंतव्य यह नहीं है कि रामानंद सागर और बी.आर. चोपड़ा को नहीं जानना चाहिये, अवश्य ही उन्हेँ भी जानना आवश्यक है क्योंकि रामायण और महाभारत जैसे महान टी.व्ही. सीरियल बनाने का श्रेय प्राप्त होने के कारण उनका नाम भी हिंदू संस्कृति के इतिहास में अमर हो चुका है. परंतु मैं यह कहना चाहता हूँ कि महर्षि वेद व्यास, ऋषि वाल्मीकि और संत तुलसीदास के नाम को कदापि नहीं भुलाया जाना चाहिये. उनका नाम अमर था, अमर है और अमर रहेगा. हाँ यह अवश्य है कि, जैसे बादल के पीछे आने के कारण चंद्रमा कुछ समय के लिये छुप जाता है, उनका नाम भी कुछ समय के लिये विलुप्तप्राय सा हो गया है.
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टिप्पणियाँ

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  1. विडम्बना नहीं

    sniti

    30 अप्रैल 2008

    नाम से ज्यादा जो सन्देश वे सभी भारतीयो को देना चाहते थे वह महत्वपूर्ण है,चाहे वे रामानन्द सागर हो या वाल्मिकी या तुलसीदास। दूरदर्शन के माध्यम से जन जन तक रामायन को परिचित करने वाले हर प्रयास को समान आँकने की जरूरत है।

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