भारतीय सिनेमा
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300
प्रकाशन तिथि: सितम्बर 26, 2006
भारतीय सिनेमा ने प्रगति के रास्ते में कदम रखा और उसके बाद मुड़ कर कभी पीछे नहीं देखा|अलग-अलग दौर में अलग-अलग प्रकार की फिल्मों का प्रचलन रहा है| शुरू-शुरू में धार्मिक एवं पौराणिक फिल्मों को पसंद किया जाता था| फिर लोगों का झुकाव ऐतिहासिक फिल्मों की ओर हो गया फलस्वरूप ऐतिहासिक फिल्में अधिक बनने लगीं| उसके बाद प्रेम-प्रधान (रोमांटिक) और संगीत-प्रधान फिल्मों का जमाना आया| रेडियो में फिल्मी कार्यक्रमों की बहुलता आ गई और बिनाका गीतमाला ने फिल्म संगीत को सर्वोच्च शिखर पर पहुँचा दिया| एक लंबे अंतराल तक प्रेम-प्रधान (रोमांटिक) और संगीत-प्रधान फिल्मों ने अपना प्रभुत्व बनाये रखा| बीच-बीच में मारधाड़ वाली (स्टंट) फिल्में भी बनती रहीं| महानायक अमिताभ बच्चन के अभ्युदय ने एक बार फिर फिल्मों को एक महान परिवर्तन दिया, नायक-प्रधान फिल्में बनने लगीं और एंग्री यंगमैन का वर्चस्व स्थापित हो गया जो कि कमो-बेस आज तक जारी है| भारत में टेक्नीकलर स्टूडियो न होने के कारण इस फिल्म की धुलाई लंदन में करवाई गई थी| फिर ईस्टमेन कलर का जमाना आया और अधिकतर फिल्में ईस्टमेन कलर में ही बनने लगीं|