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कोई आदमी भूखा न मरे

द्वारा : Vivikt    

लेखक : Madhu Ahuja
निम्नलिखित भाषा से यह संक्षिप्त लेख अनूदित हुआ Let nodody die of hunger
आज के व्यावसायिक एवं भौतिक युग मैं मानती हूँ कि हमें ग़रीब लोगों की सहायता के लिए बदलना होगा। मुंबई तथा नवीं मुंबई में लाखो
लोग हैं जो भूख से मर रहे हैं।। बड़ी कंपनियों के जूते, कपडे, बैग, ज्वेलरी, मेकअप किट की शापिंग पर हज़ारों रूपए ख़र्च करने के बजाय हम लोगों को ग़रीबों और निम्न स्तर के लोगों के उत्थान के लिए जागृत प्रयासों में हमारा निवेश करना चाहिए केवल गैर सरकरी संस्थाए तथा भारत सरकार ग़रीब लोगों की रोटी, कपडे और रहने के लिए सहायता नहीं कर सकते। आप और मुझे उन लोगों को खाने, पहनने तथा रहने आसरा का देना चाहिए। यदि हम भारत को एक विकसित राज्य बनना चाहते हैं तो हम हमारे देश के किसानों, मज़दूरों, भिखारियों तथा अन्य लोगों ग़रीब लोगों को मरने नहीं दे सकते। हम मध्यम एवं उच्च वर्ग के लोगों को हमारी अनुपयोगी वस्तुएँ उन्हें देना चाहिए। आओ कोई आदमी भूखा न मरे। इससे भारत एक विकसित राष्ट्रो में एक होगा।
प्रकाशन तिथि: मई 24, 2006
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टिप्पणियाँ

  1. 0 समीक्षा 27 नवम्बर 2007
    1

    sniti

    कोई आदमी भूखा न मरे

    जब तक जन्सन्ख्या नियंत्रण न होगा, समस्या बनी रहेगी।

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