चीन के सबसे मज़ेदार और सबसे लोकप्रिय उपन्यासकार वांग शुओ ने इस बार अपने व्यंग्य का निशाना दुनिया के पवित्रतम समारोह में से
एक ओलंपिक खेलों को बनाया है। प्लीज़ डोंट काल मी ह्यमैन, यानी मुझे इन्सान मत कहो में वांग ने इस तरह के ओलंपिक खेलों की कल्पना की है, जिसमें सभी देश खेलकूद के क्षमता के आधार पर मुकाबला नहीं करते, बल्कि उनमें इस आधार पर मुकाबला होता है कि किस देश के नागरिकों में ज्यादा अपमान या
बेइज्जती झेलने की क्षमता है। इसमें चीन की
कोशिश है कि वो हर हालत में जीत हासिल करे। अपने कटाक्ष और अश्लीलता के कारण इस किताब पर चीन में पाबंदी लगा दी गई है।
वांग ने ये कहने की कोशिश की है कि चीन के आदमी बेहद निर्लज्ज और बेशरम होते हैं। बेइज्जती का उन पर कोई असर नहीं होता है। जाहिर है, ये बात चीन की सरकार को पसंद नहीं आ सकती थी। वैसे इस किताब में वांग शुओ की अपनी शैली और प्रतिभा का पूरा दर्शन इसमें मिलता है और अपनी इसी खूबी के कारण वो जाने जाते हैं।